Ahmad Rizvi

भूकम्प (ज़लज़ला)

चित्र
               भूकम्प (ज़लज़ला) सूरे ज़िलज़लाह  आयत संख्या 1 “ इज़ा ज़ुलज़लाती अर्ज़ ज़िलज़लाह ” जब ज़मीन ज़ोरों से हिला दी जाएगी । कुरान मजीद हर दौर (सब ज़माने/ वक़्त/ युग ) के लिए है भूकम्प या ज़लज़ला के बारे मे जैसा कुरान हकीम मे उल्लेख किया गया है वैसा कहीं और नहीं है पिछले दौर मे भूकम्प आए होंगे हाल मे भी भूकंप आते है और आने वाले समय मे भी भूकम्प आएंगे लेकिन जिस दौर के भूकम्प का जिक्र किया जा रहा है उस के बारे मे आगे आयत बता रही है कि ज़मीन खज़ाने (लफ़्ज़ अखरज़ात का जिक्र किया जिसका अर्थ है खर्च होने वाली चीजे का निकलना जैसे कोयला गैस पेट्रोल डीज़ल सोना कोबाल्ट आदि) उगल देगी । उस वक़्त के ज़मीन के ज़ोरों से हिला देने का जिक्र किया गया है । ज़मीन के हिलाने का ज़िक्र जो किया गया है उसमे यह नहीं कहा गया है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के हुक्म से भूकम्प आएगा मलाएका या जिन्न  के कारण आएगा या आदमी के द्वारा बनाए गये असलहे के कारण होगी इन सब से भूकम्प या जलजला आ सकता है लेकिन सच्ची किताब ने आने वाले वक़्त मे जो जिक्र किया है उसे आज की दुनिया मे समझा जा सकता है पहले के...

दोहरी शिक्षा प्रणाली और भारत

दोहरी शिक्षा प्रणाली: भारत को आज़ाद हुए लगभग 75 वर्ष हो चुके है इसके साथ ही शिक्षा के स्तर मे जो सुधार हुए हैं उनका लाभ मध्यम वर्ग और ऊंचे वर्ग के लोगों के लिए है, शिक्षा में जिस तरह का वर्गीकरण किया गया है उसके अनुसार समाज को तरह तरह से बांटा गया है आजाद भारत में शिक्षा को बांटने का तरीका यह रखा गया है कि गरीब की शिक्षा और अमीर की शिक्षा और जहां तक अमीरों की शिक्षा की बात है उसका माध्यम पूरे देश के अंदर इंग्लिश मीडियम को रखा गया है जबकि गरीब और मध्यम वर्ग की भाषा का माध्यम क्षेत्रीय भाषाओं को रखा गया है गरीबों की शिक्षा का जो स्तर बनाया गया है उसमें शिक्षा को उसमें शिक्षा को कई तरह से प्रस्तुत किया जाता है 1 शिक्षा का माध्यम वह है जिसे नगर महापालिका के स्कूल मैं दी जाने वाली शिक्षा का स्तर बहुत ही निम्न होता है जहां से पढ़नेसे बच्चे को रोजगार के रूप में लेबर क्लास बनाया जाता है अपवाद कहीं भी हो सकता है इसलिए अपवाद के बारे में कोई बात नहीं करेंगे उसके बाद माउंटेन सरी शिक्षा का माध्यम है जो निजी व्यक्तियों के द्वारा दिया जाता है इस शिक्षा में आप को जो शिक्षा प्रदान की जाती है उसका मूल्य निर्धारित रहता है कुछ सरकारी स्कूल जो हिंदी माध्यम से हैं जैसे कि नवोदय विद्यालय जहां पर शिक्षा के स्तर को बनाए रखा गया है अब शिक्षा का जो माध्यम इंग्लिश मीडियम में रखा गया है उसमें भी कई प्रकार की शिक्षा को देश के अंदर दिया जा रहा है यह शिक्षा की शुरुआत से ही व्यक्तियों का वर्गीकरण कर दिया जाता है इसमें लेबर क्लास किलर किलर किलर किलर ऑफिसर क्लास और उससे ऊपर की शिक्षा को प्रदान किया जाता है हमारे देश के अंदर समान नागरिक संहिता की बातों की जाती है जिसका नागरिकों के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन समान शिक्षा के मुद्दे को किसी भी राजनीतिक के द्वारा या व्यक्तियों के द्वारा या संस्था के द्वारा नहीं उठाया जाता है क्योंकि अगर शिक्षा समान होगी तो जहां s पी का लड़का पड़ेगा वहीं पर सिपाही का लड़का पड़ेगा वहीं पर करना पड़ेगा पड़ेगा पड़ेगा तो जहां SP लड़का पड़ेगा वहीं पर सिपाही का पड़ेगा वहीं पर करना पड़ेगा यहां से यहां से स्वच्छ प्रतिस्पर्धा की शुरुआत होगी लेकिन देश को संचालित करने वाले शासकों द्वारा इस और जानबूझकर या ना चाहते हुए इस कार्य को नहीं करना चाहते हैं सभी के लिए समान अवसर हैं ₹200000 खर्च होगी अपने बच्चे को ऐसी संस्थाओं में उसका एडमिशन करा पाएगा इसी तरह मेडिकल में व अन्य संस्थाओं संस्थाओं में जबरदस्त भेदभाव पूर्ण समाज बनाया गया है अगर समाज को उन्नति करनी है उन्नति करनी है तो तो उसके लिए तो उसके लिए हम सबकी एक ही मांग होनी चाहिए कि हमारी शिक्षा पूरे देश में एक हो यह नहीं किसी गरीब की शिक्षा का माध्यम क्षेत्रीय भाषाएं हो और गरीब की शिक्षक अमीर की शिक्षा का माध्यम और गरीब की शिक्षक अमीर की शिक्षा का माध्यम इंग्लिश मीडियम गरीब और अमीर की शिक्षा का माध्यम एक होना चाहिए जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक हम आजाद होते हुए भी यह गुलाम हैं जिस गुलामी से कभी भी बाहर नहीं आया जा सकता कभी-कभी लोग जापान की उन्नति की बात करते हैं कभी रूस की उन्नति की बात करते हैं जापान की उन्नति की बात करते हैं कभी रूस की उन्नति की बात करते हैं कि उनकी अपनी अपनी लैंग्वेज में अपनी अपनी भाषा में उन्होंने तरक्की की है या 1020 लैंग्वेज लैंग्वेज का प्रचलन नहीं है अपने उर्दू कश्मीरी पंजाबी गुजराती बंगाली मराठी तमिल कन्नड़ मलयालम सैकड़ों जवानी है तो हमारी शिक्षा का माध्यम एक जब तक नहीं होगा तब तक हम एक राष्ट्र के रूप में एक नागरिक के रूप में एक अच्छे समाज के रूप में उन्नति नहीं कर सकते हैं

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मौला अली साबिक अम्बिया से अफज़ल है

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

इंजील (बाइबल ) मे मोहम्मद मुस्तफा रसूलउल्लाह का उल्लेख