संदेश

अगस्त, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

विस्तारवाद

चित्र
विस्तारवाद का युग समाप्त हो गया क्या हकीकत मे विस्तारवाद का युग समाप्त हो गया इसके लिए आपको अन्तराष्ट्रीय घटनाओ पर नज़र डालनी पड़ेगी 2001 मे जिस समय अफगानिस्तान पर अमेरिका ने अपने कुख्यात गिरोह के द्वारा हमला किया और 2001 से लेकर 2021 तक अफगानिस्तान पर क़ब्ज़ा जमाए रखा इसके बाद अमेरिका ने अपने कुख्यात गिरोह के साथ इराक पर हमला किया और उसको क़ब्ज़ा किया 2008 मे रूस ने जारजिया के प्रांत आबखाजीया पर हमला करके उसपर क़ब्ज़ा किया गया लगातार अमेरिका अपने आतंकवादी साथियों के साथ भी हमला करता रहा है जैसे लीबिया मे आतंकी के साथ मिलकर अमेरिका ने लीबिया पर क़ब्ज़ा किया सीरिया और इराक और उसके स्रोतों पर कब्जा करने के लिए अमेरिका और उसके कुख्यात गिरोह के द्वारा आई.एस. आई. एस. को खड़ा किया ट्रैनिंग दी और कुख्यात आतंकीयों की फौज को इराक और सीरिया मे आतंक मचाने और क़ब्ज़ा करने मे मदद दी यूक्रेन मे चुनी हुई सरकार को अमेरिका और उसके कुख्यात गिरोह ने तख्तापलट करा दिया और 2014 मे रूस ने क्रिमिया को अपने कब्ज़े मे ले लिया 2020 मे आर्मेनिया और अज़रबेजान मे युद्ध हुआ और आर्मेनिया नोगोंरनों कराबाख हार गया वर्तमान मे 2022 से ...

विदअत

चित्र
विदअत क्या है इस्लाम मे विदअत ऐसे कार्य को करना है जो हुक्म अल्लाह ज़ुलजलाल वल इकराम व रसूल उल्लाह मोहम्मद मुस्तफा अहमद मुजतबा सललल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने न किया हो । अज्ञानी मौलवी ने “रोने को विदअत “ कहना शुरू कर दिया वो इसलिए कि आले मोहम्मद सललल्लाहों अलैह व आले वसल्लम इमाम हुसैन और उनके कराबतदारों, मेहमानों, और दोस्तों को कर्बला मोअल्ला मे शहीद कर दिया गया । आले मोहम्मद सललल्लाहों अलैह व आले वसल्लम से मोअददत करने वाले लोग अपनी मोअददत मे उन पर होंने वाले ज़ुल्म पर रोते है । मुआविया और यज़ीद लानत उल्लाह अलैह से लगाव रखने वाले और उनसे मोहब्बत करने वाले, हुसैनियों से नफरत करते है और रोने को विदअत कहते है । “रोने को विदअत “ कहने वाले उस वक्त खामोश हो गये जब हज़रत आदम के रोने का ज़िक्र आया, जब हज़रत याकूब के रोने का ज़िक्र आया, और अल्लाह ज़ुलजलाल वल इकराम के नबी मोहम्मद मुस्तफा अहमद मुजतबा सललल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के रोने का ज़िक्र आया वह भी तब जब हज़रत हमज़ा की शहादत हुई और कर्बला मे अपने नवासे इमाम हुसैन की होने वाली शहादत का पहले से बता देना और गिरया (रोना) करना साबित कर रहा था कि रोना ...

उलूल इल्म

चित्र
उलूल इल्म शहीदउल्लाहु अन्नहु ला इलाहा इल्ला हुआ व मलायकतु व उलूल इल्म क़ायमन बिल किस्त ला इलाहा इल्ला हुवल अज़ीज़ुल हक़ीम (सूरे आले इमरान आयत नं.18) “ अल्लाह खुद गवाह है कि नहीं है कोई इलाहा (पूज्य) सिवाय उसके व मलाएका (फ़रिश्ते) व एक के बाद एक कायम होने वाले उलूल इल्म (साहिबाने इल्म) गवाही देते है नहीं है कोई इलाहा सिवाय उस अज़ीज़ुल हक़ीम के “ अब चर्चा का विषय (मौज़ू) उलूल इल्म है । इल्म (ज्ञान) नबीयों की मीरास (legacy) है। सूरे कहफ (आयत नं. 60 से 82) और याद करो जबकि मूसा ने अपने युवक सेवक से कहा : जब तक कि मै दो दरियाओ के संगम पर न पहुँच जाऊं हटने का नहीं, अन्यथा मै एक लम्बे समय तक चलता रहूँगा । तो जब वे संगम पर पहुंचे दोनों (दरियाओ) के बीच, तो वे अपनी मछली भूल गये, और उस (मछली) ने दरिया मे की तरह अपना रास्ता बना लिया । फिर जब वे आगे चले, तो (मूसा ने) अपने युवक सेवक से कहा : हमारे लिए खाना लाओ इस सफर से हमको बहुत तकलीफ हो गई है । उसने कहा : भला आप ने देखा कि जब हमने पत्थर के पास आराम क्या था तो मै मछली वहीं भूल गया और मुझे आप से उसका ज़िक्र करना शैतान ने भूला दिया और उस ने अजब तरह से दरिय...