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Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

अमेरिका का दोगलापन

अमेरिका दोगला है इसकी नजीर ये है एक तरफ दुनिया भर के मुस्लिम मुल्को के atomic weapon पर हाय तोबा मचाने वाले देश विषेशरूप से अमेरिका britain france मौन क्यो हो जाते है israel के atomic weapon पर , क्यो मौन हो जाते है उत्तरी कोरीआ के atomic weapon पर क्यो मुस्लिम देश ही निशाने पर है वो चाहे ईराक हो अफगानिस्तान हो libya हो syria हो बार्बाद कर देते है, दुसरा दोगलापन ये है दुनिया भर मे लोकतंत्र के हामी बनते है और अमेरिका birtain france के sambandh सबसे ज़्यादा बेहतर तानाशाहो से रहे है इसकी नजीर होस्नी मुबारक मिश्र के, साददाम ईराक के पाकिस्तान के तामाम सैनिक शासक रहे और उनसे अच्छे सम्बंध रहे तो ये कहना की look लोकतंत्र के समर्थक है, दुनिया को धोखा देना है, लोकतंत्र इंसाफ पक्ष्पात के खिलाफ लडने का ढ़ोंग रचने वाले अमेरिका ब्रिटेन france united nation मे veto power के खिलाफ बोलते आवाज उठाते किसी ने नही सुना देखा, दुनिया मे zyada ज़्यादातार देश ताक़त के साथ है जिस ज़लील ज़ालिम देश ने जापान के ऊपर परमाणु bomb को गिराया वो ...