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Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

मानव अधिकार और पश्चिमी देश

मानव अधिकार कर के मुद्दे को जोर शोर से उठाते हुए पश्चिमी देशों के देखा गया यह मानव अधिकार की बात को उठाना जाहिरी तौर पर तो मानव की भलाई और इंसानियत दिखाई पड़ती है मगर गहराई से तहकीकात करने पर आपको पता लगेगा की यह इंसानियत की भलाई के लिए नहीं है बल्कि अपने मकासिदो को पूरा करने के लिए के लिए किया जाता है उदाहरण के तौर पर विश्व के कुछ मुद्दों की ओर ध्यान ले जाना चाहता हूं फिलिस्तीन का मुद्दा जिसमें अब तक लाखों इंसानों को कत्ल किया गया म्यानमार में कत्लेआम को देखा जा चुका है इराक में कुर्दओ और शियो़ पर होने वाले कातिल जो कत्ल सरकारी मशीनरी के द्वारा किया गया गुजरात में हुए कत्ल पर या तो पश्चिमी देशों के द्वारा औपचारिकता से उन देशों के हुक्मरानों की ज़बानी भर्त्सना की गई और उसकी अलावा कुछ नहीं किया गया कुछ ऐसे उदाहरण भी हैं जहां पर तुरंत कार्यवाही की गई अमेरिका अमेरिका में नाइन इलेवन के हमले जिसकी जांच और उसके नतीजे भी नहीं आए थे अफगानिस्तान को मुर्दे इल्जाम ठहरा दिया गया था कुवैत पर इराक के हमले का विरोध करते हुए उस पर 32 देशों द्वारा हमला किया गया वही चाइना के द्वारा तिब्बत सिंह की आंख मंच...