Ahmad Rizvi

अखण्ड भारत

अगर अखंड भारत मे बांग्लादेश को पाकिस्तान श्रीलंका म्यानमार अफ़्गानिस्तान तिब्बत को मिलाना है तो घुसपैठिया कैसे? वो तो अखंड भारत के नागरिक ही हुवे या जिस तरह बौधो का क़त्ल किया गया उसी तरह मुसलमानों का क़त्ल किया जाना है या आर एस एस और उसकी आनुषंगिक संगठन प्रयोग के तौर पर मोब लिन्चीन्ग कर रही है और मुसलमानों की तरफ़ से होने वाले प्रतिरोध को भी देख रही है और विश्व भर के मुसलमानों के प्रतिरोध या प्रतिक्रिया को भी देख रही है  गुजरात मुस्लिम नरसंहार और मुज़फ़्फ़रनगर मे मुसलमानों के नरसंहार के बाद देखा गया कि मुसलमानो को तबाह बरबाद और ताराज किया जा सकता है बोसनिया हरजेगोविना मे मुसलमानों के नरसंहार पर विश्व मुस्लिम नेत्रत्व की प्रतिक्रिया नक्कार खाने मे तुति की आवाज़ थी अमेरिका और इस्राइल ने करोडो मुसलमानों का क़त्ल बडी हिक़्मत से किया और बड़े संसाधनो को लूटा है हाल ही मे म्यानमार मे रोहिन्गया मुसलमानों को क़त्ले आम किया गया और उन्हे बर्बाद करके दूसरे देशो मे बदतरीन ज़िन्दगी जीने को मजबूर किया गया है और किया जा रहा है फ़िलिस्तीन मे मुसलमानों का क़त्ले आम किया जा रहा है और दुनियाभर के मुस्लिम हुक़ुमत ख...

मौत का सौदागर : 2

भारत का संविधान के अनुच्छेद 361 मे वर्णन इस प्रकार है
राष्ट्रपति और राज्यपालों और राजप्रमुखो का संरक्षण -
(1) राष्ट्रपति अथवा राज्य का राज्यपाल या राजप्रमुख अपने पद की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यो के पालन के लिए या उन शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यो का पालन करते हुए अपने द्वारा किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्य के लिए किसी न्यायालय को उत्तरदायी/answerable नहीं होगा: परन्तु अनुच्छेद 61 के अधीन आरोप के अनवेषण के लिए संसद के किसी सदन द्वारा नियुक्त या अभिहित किसी न्यायालय, अधिकरण या निकाय द्वारा राष्ट्रपति के आचरण का पुनर्विलोकन किया जा सकेगा: परन्तु यह और कि इस खण्ड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के विरुद्ध समुचित कार्यवाहीयां चलाने के किसी व्यक्ति के अधिकार को निर्बंधित करती है। (2) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय मे किसी भी प्रकार की फ़ौजदारी कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी या चालू नहीं रखी जाएगी। (3) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए किसी न्यायालय एसई कोई आदेशिका निकाली जाएगी। (4) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के रूप मे अपना पद ग्रहण करने से पहले या उसके पश्चात, उसके द्वारा अपनी वैयक्तिक हैसियत मे किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्य के सम्बन्ध मे कोई सिविल कार्यवाहियाँ,जिनमे राष्ट्रपति या ऐसे राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध अनुतोष का दावा किया जाता है,उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय मे तब तक संस्थित नहीं की जाएगी जब तक कार्यवाहियों की प्रक्रति, उनके लिए वाद हेतुक,ऐसी कार्यवाहीयों को संस्थित करने वाले पक्षकार का नाम,वर्णन ,निवास-स्थान और उस अनुतोष का जिसका वह दावा करता है, कथन करने वाली लिखित सूचना,यथास्थिति, राष्ट्रपति या राज्यपाल को परिदत्त किए जाने या उसके कार्यालय मे छोड़े जाने के पश्चात दो मास का समय समाप्त नहीं हो गया है। विश्व समुदाय या अन्य देशो को दिखाने के लिए गठित की गयी SPECIAL INVESTIGATION TEAM के प्रति तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री उत्तरदायी/ANSWERABLE नहीं थे और वैसा ही उनके द्वारा किया गया जो लोग कानून के जानकार नहीं है वह न्याय की उम्मीद और दोषियों पर मुकदमा चलाने की बात कर रहे थे जबकि संविधान के अनुच्छेद 361 मे स्पष्ट दिया गया है कि उनको संरक्षण प्राप्त है,
राष्ट्रपति और राज्यपालों और राजप्रमुख अब इस राजप्रमुखो का उल्लेख नहीं किया गया । इससे न्यायालय राजप्रमुख के विरुद्ध कोई मुकदमा नहीं चला सकता और राजप्रमुख न्यायालय के प्रति उत्तरदायी/ANSWERABLE भी नहीं है। इस प्रकार विपक्षी या अन्य दल उनके विरुद्ध भददी टिप्पणी जैसे मौत का सौदागर ,कातिल खूनी कुछ भी कह सकता है लेकिन न्यायालय मे शक्तियों का प्रयोग करने के लिए मुकदमा कानून की अदालत मे नहीं चलाया जा सकता।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मौला अली साबिक अम्बिया से अफज़ल है

खतना

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम