Posts

Showing posts with the label right to live

Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

क्या भारत मे मुसलमानों को रहने का अधिकार है या नहीं जबकि पाकिस्तान का निर्माण हो चुका

Image
सन 1947 मे अंग्रेजों के द्वारा indian partition act 1947 को ब्रिटिश संसद मे पारित किया गया, बटवारा दो देशों इंडिया और पाकिस्तान मे किया गया। यह बटवारा ब्रिटिश इंडिया जो कब्जा ब्रिटेन का था, बटवारा भी उन इलाकों का किया गया जहाँ पर मुस्लिम बहुल के साथ अलग होने के लिए वोटिंग कराई गई थी।देशी रियासते:- भारत मे आजादी से पहले व आजादी के बाद देशी रियासते थी, देशी रियासते वह रियायतें थी जिन्हें राजाओ, बादशाहो ,नवाबो, निजामो द्वारा शासित किया जाता था, देशी रियासत जिन पर अंग्रेजो की अधीनता नही थी उस पर सवाल उठने लगे कि उनका क्या होगा, इस पर अंग्रेजो़ ने देशी रियासत के लिये 3 प्रकार के प्राविधान किये :1. देशी रियासत आजाद बनी रहना चाहे आजाद बनी रह सकती है। 2. भारत मे मिलना चाहे तो भारत मे मिल सकती है। 3. पाकिस्तान मे मिलना चाहे तो पाकिस्तान में मिल सकती है। पाकिस्तान का बटवारा ब्रिटिश इंडिया व देशी रियासत के सम्पूर्ण मुसलमानों के लिए नहीं हुआ था, यह बटवारा क्षेत्रीय मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए था, आजाद भारत मे देशी रियासत जिसमे हिन्दू ,मुस्लिम व अन्य थे भारत मे मिलने ...