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Ahmad Rizvi

पत्रकारिता (सहाफ़त) की आड मे जासूसी

 अफ़्गनिस्तान मे रशीद दोस्तम को क़ातिल एक पत्रकार बनकर आया और क़त्ल कर दिया | ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई को स्पीच देने के दौरान किसी नामालूम सहाफ़ी ने बम नस्फ़ कर दिया था जिसमे आपका एक हाथ माज़ूल हो गया था |  ईरान मे यहूदी महिला जासूस ने सहाफ़ी बनकर किस तरह अपने ताल्लुक़ात को कायम किया कि तमाम फ़ौजी जनरलो के साथ साथ सुप्रीम लीडर से भी मुलाक़ात की और तमाम फ़ौजी जनरलो की सूचना और पते मोसाद और इस्राइल को पहुंचाती रही | लगातार इस्राइल सहाफ़ीयों का क़त्ल कर रहा है उसका मुख्य कारण यह है कि इस्राइल खुद अपने जासूसो को सहाफ़ी बनाकर भेजता है और दुनिया भर के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल वो जासूसी के लिए करता है और जहां इस्राएल नही पहुंच पाता है वहां  अपने दोस्त देशो के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल करता है  हाल ही मे अपने देश भारत मे भी सहाफ़ी और यूटयुबर ज्योति मेहरोत्रा को जासूसी के आरोप मे गिरफ़्तार किया गया | इस्राइल के जासूसो को अगर पकड़ना है तो इस्राइल समर्थक सहाफ़ीयों पर कडी नज़र रखनी होगी! 

अमेरिका का दोगलापन

अमेरिका दोगला है इसकी नजीर ये है एक तरफ दुनिया भर के मुस्लिम मुल्को के atomic weapon पर हाय तोबा मचाने वाले देश विषेशरूप से अमेरिका britain france मौन क्यो हो जाते है israel के atomic weapon पर , क्यो मौन हो जाते है उत्तरी कोरीआ के atomic weapon पर क्यो मुस्लिम देश ही निशाने पर है वो चाहे ईराक हो अफगानिस्तान हो libya हो syria हो बार्बाद कर देते है, दुसरा दोगलापन ये है दुनिया भर मे लोकतंत्र के हामी बनते है और अमेरिका birtain france के sambandh सबसे ज़्यादा बेहतर तानाशाहो से रहे है इसकी नजीर होस्नी मुबारक मिश्र के, साददाम ईराक के पाकिस्तान के तामाम सैनिक शासक रहे और उनसे अच्छे सम्बंध रहे तो ये कहना की look लोकतंत्र के समर्थक है, दुनिया को धोखा देना है, लोकतंत्र इंसाफ पक्ष्पात के खिलाफ लडने का ढ़ोंग रचने वाले अमेरिका ब्रिटेन france united nation मे veto power के खिलाफ बोलते आवाज उठाते किसी ने नही सुना देखा, दुनिया मे zyada ज़्यादातार देश ताक़त के साथ है जिस ज़लील ज़ालिम देश ने जापान के ऊपर परमाणु bomb को गिराया वो ...