Ahmad Rizvi

ट्रंप का ज़ेहनी तवाज़ुन क्यों खराब हो गया?

 सन 1979 के इस्लामिक क्रान्ति के आने के बाद से अब तक अमेरिका ब्रिटेन और अन्य देश ईरान से दुश्मनी करते चले आ रहे हैं | अमेरिका इस दुश्मनी मे सरे फ़ेहरिश्त आगे आगे रहा है इराक़ के ज़रिये ईरान पर हमला करा दिया नतीजा अमेरिका के पक्ष मे नही आया  सन 1979 से लगातार अमेरिका और उसके हवारी ईरान पर सैन्क्सन (प्रतिबंध) लगाकर ईरान को आर्थिक रूप से कमज़ोर करने के साथ ईरान मे इस्लामिक सत्ता को उखाड़ फ़ेकने का ख्वाब सजोये हुवे थे जो अब तक तामीले तकमील तक कभी पहुंच नही सका | 28 फ़रवरी 2026 पर साम्राज्यवादी और दूसरे देशो के संसाधनो को लूटने वाला अमेरिका और उसका पिटटू इस्राइल ने मिलकर इस्लामी जम्हूरिया ईरान पर हमला कर दिया इस हमले मे ईरान को जो नुकसान हुवा उससे अमेरिका और इस्राइल खुश है| ईरान ने होर्मुज़ पर जहाज़ो से जो टैक्स लेना शुरू कर दिया है उससे ईरान की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर होती जा रही है और अमेरिका और इस्राइल अपनी ज़ेहनी तवाज़ुन को खो दिया  अमेरिका और उसके हवारी देशो के 1979 से जो प्रतिबंध लगाये थे और ईरान को जो नुकसान पहुंचा था वो अब खत्म हो गया है  डोनाल्ड ट्रंप इस कारण ज़ेहनी तवाज़ुन...

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है |

अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है |

एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |


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