Ahmad Rizvi
अमेरिका ने इस्राइल की हिफ़ाज़त के लिए न केवल इस्राइल मे आइरन डोम डेविड स्लिन्ग थाड सिस्टम आदि दिया है इसके साथ अरबो को थाड सिस्टम आदि दिया था क्यों? जानते हैं अरबो की हिफ़ाज़त के लिए नही इस्राइल की सुरक्षा के लिये दिया था और उस सुरक्षा की कीमत अरब चुका रहे हैं जैसे ही इस्राइल पर हमला हो defence system उसे रोक ले चाहे इराक़ हो सिरिया हो जार्डन हो सऊदी हो ओमान हो बहरीन हो क़तर हो कुवैत हो मुताहिदा अरब अमीरात हो सब इस्राइल की हिफ़ाज़त कर रहे थे वो जाने मे हो या अन्जाने मे हो अमेरिका की 5 फ़्लीट बहरीन मे गल्फ़ देशो की हिफ़ाज़त नही कर रही है बल्कि इस्राइल की हिफ़ाज़त कर रही है दौलत अरबो की हिफ़ाज़त इस्राइल की
कुफ़्र व मुनाफ़कत
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अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है |
अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है |
एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |
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दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम
दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीरे खुम कुफ़फार मक्का जब मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम को रसूल उल्लाह नहीं मानते थे तब भी अल्लाह के नबी को सादिक, अमीन और वादे को पूरा करने वाला समझते थे, मानते थे। सूरे अश-शुअरा (सूरे 26 आयत नं. 214) के अनुसार “ और अपने निकटतम सम्बन्धियों को सावधान करो” जब यह आयत नाज़िल हुई, तो अल्लाह के नबी मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने एक दावत का आयोजन किया जिसे इतिहास मे दावत ज़ुल अशिरा कहा जाता है । बनी हाशिम (हाशिम के वंशज) से लगभग 40 लोगों को बुलाया गया हज़रत अली इब्ने अबी तालिब अलैहिस सलाम ने खाने का प्रबन्ध किया। मेहमानों को खाना- पानी परोसने के बाद जब नबी करीम मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम उनसे इस्लाम के बारे मे बात करना चाहा, तो अबू लहब ने उन्हे रोक दिया और कहा, आपके मेजबान ने आपको बहुत पहले ही जादू कर दिया है । अल्लाह के नबी मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम द्वारा उन्हे अपना संदेश देने से पहले सभी मेहमान तितर-बितर हो गये। अगले दिन अल्लाह के नबी मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने उन्हे आमंत्रित किया। ...
इंजील (बाइबल ) मे मोहम्मद मुस्तफा रसूलउल्लाह का उल्लेख
हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैह व आले वसल्लम के वसी जानशीन मुत्तकियों के इमाम हादी खैबर व खंदक के फातेह अमीरल मोमीनीन हज़रत अली इबने अबु तालिब सलामउल्लाह अलैह के इस कथन से कि मै जुबूर वाले को जुबूर से तौरेत वाले को तौरत से और इंजील वालो को इंजील से (दीन) समझाता। इस बात की जानकारी होने पर मौला का एहसान है जो इल्म मिला वो आपकी मार्फत से मिला इंजील जुबूर और तौरेत मे हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का ज़िक्र (उल्लेख) है इंजील पढ़ने और उसमे हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का ज़िक्र खोजना शुरू किया जिन नतीजो को पाया वह इस प्रकार है:- मती: 23: 24 से 26 क्योंकि मै तुम से कहता हूँ कि अब से तुम मुझे तब तक नही देखोगे जब तक यह न कहोगे : " धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है" प्रभु के नाम से आता है यहाँ प्रभु का अर्थ अल्लाह के लिए कहा गया कहा गया जैसा कि सुरे सफ(61) की आयत 6 मे आया है कि मै तुम्हारी तरफ अल्लाह का रसूल हूँ और अल्लाह के नबी हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैह व आले वसल्लम भी अल्लाह के रसूल है । अब मुझे तब ...
मौला अली साबिक अम्बिया से अफज़ल है
मौला अली साबिक अम्बिया से अफज़ल है । कुछ मुसलमान अपने इल्म की कमी के कारण या मौला अली से बुगज़ रखने के कारण उनके दिमाग मे सवाल पैदा होते है और सार्वजनिक (public) प्लेटफार्म पर ऐसे सवाल उठाते भी है । आज इन सवालातों के जवाब को तलाश करते है। मौला अली अंबियाओ से अफज़ल है तो इसकी कोई दलील है , जी हाँ, इसकी दलील है । सवाल : क्या नबी करीम मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम नबीयों, अमबीयाओ, रसूलों, मलायका (फरिश्तों) और जिन्नतों के मौला है ? जवाब : जी हाँ , नबी करीम मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम नबीयों, रसूलों, अम्बियाओ, मलाएका, और जिन्नतों से न केवल अफज़ल बल्कि मौला है जब अल्लाह सुभान व तआला ने आदम के पुतले मे जान डाली तो हुक्म दिया मलाइका और जिन्न को सजदा हज़रत आदम का करना । फखरे अम्बिया सबसे अफज़ल है । सवाल : क्या ईसाई यहूदी मुशरिक काफिर के भी आप मौला है ? जवाब : नहीं , जो नबी करीम मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम को मौला नहीं मानता है उसको अख्तियार है कि मौला न माने । सवाल : क्या हज़रत ईसा के भी मौला है नबी करीम मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ? ज...
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