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Ahmad Rizvi

पहला मुनाफिक - इबलीस

  पहला मुनाफिक – इबलीस मुनाफिक के मायने है दोगला , ढोंगी , कपटी वो शख्स जो ज़बान से कुछ और हो और दिल मे कुछ और । इबलीस (शैतान) मलायका के सफ़ों मे पहुँच गया । हज़रत आदम के पुतले और रूह को स्थापित करने तक मे इबलीस के मुनाफिक होने और काफिर होने को अल्लाह सुभान व तआला ने सामने ले आया । लौह-ए-महफ़ूज़ मे फरिश्तों मे एक नाफरमान होने का ज़िक्र किया गया तब तक यह इल्म अल्लाह से मलायका के बीच मे आ   गया तुम मे से एक नाफरमान होगा इस मुनाफ़क़त को अल्लाह रब्बुल आलमीन ने बता दिया एक बात और इस मुनाफिक और   अल्लाह के रसूल की बज़्म मे बैठने वाले मुनाफिको के बारे मे भी अल्लाह को पता है और सूरे मुनाफिक मे उनका ज़िक्र भी कर दिया यह मुनाफिकत का राज कब खुलेगा आगे देखिए जब तक आदम का पुतला बना गया इबलीस की मुनाफ़क़त नहीं खुलती है जैसे ही रूह को फूंकने के साथ सजदा मे चले जाने का हुक्म फरिश्तों को दिया गया सभी फ़रिश्ते सिर्फ इबलीस को छोड़कर सजदे मे चले गए और इस इनकार का अंजाम शैतान को फटकार और लानत के रूप मे तोहफा मिला । अब इबलीस मुनाफिक से सीधा काफिर हो गया । एक बात और तौहीद वालों के लिए इबलीस तौहीद का इनका...

72 हूरे

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72 हूरे हो या 72000 हूरे हो यह अक़ीदा /ईमान तो उसका है जो अल्लाह पर भरोसा करता है और उस कुफ़फार को अल्लाह के वजूद का ही विश्वास (यकीन) नहीं , उसके वजूद का इंकार करता है उसके लिए न हूर न लंगूर है न गिलमा है न जन्नत है न हिसाब किताब है न महशर है न कयामत है न फ़रिश्ते है गोया कुछ नहीं और तुम्हारी कोई बाजगश्त (पूछ ताक्ष ) नहीं जो ज़ुल्म करो जो भलाई करो सब ठीक । लेकिन जो इस पर यकीन रखता है ईमान है उसको मालूम है कि उसके इन कारनामों की भलाई और बुराई की सजा और जजा (बदला ) है लेकिन उसके इस बेयकीनी से सच्चाई को बदला नहीं सकेगा और अल्लाह इरशाद फरमाता है कि यहाँ तक कि तुमने कब्रों से मुलाकात कर ली , देखो तुम्हें अनकरीब मालूम हो जाएगा और फिर खूब मालूम हो जाएगा , देखो अगर तुम्हें यकीन इल्म हो जाता कि तुम जहन्नम को जरूर देखोगे फिर उसे अपनी आँखों से देखे यकीन की तरह देखोगे और फिर तुम से उस दिन नेअमत के बारे मे सवाल किया जाएगा । “मैंने तुम्हें एक हक़ीर नुतफे से पैदा किया अपनी पहली पैदाइश को देखो मै तुम्हें दोबारा पैदा करूंगा मेरे दोबारा पैदा करने का इंकार करते है “ कुफ़फार के अल्लाह के वजूद का इंकार , उस...

मौला

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मौला अल्लाह का नाम है, हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने ईमान के बारे मे फरमाया कि जब तक तुम ईमान वाले नहीं हो सकते जब तक तुम्हारी माल,जान औलाद से ज़्यादा मै यानी मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम अज़ीज़ न हूँ । हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने अपने आखिरी हज को अंजाम देने के बाद वापसी पर “ गदीर ए खुम “ नाम की जगह पर काफिला रोका और आगे बढ़ जाने वाले काफिले को वापस पलटाने का हुक्म दिया और एक लाख या उससे ऊपर हाजियों के भरे मजमे मे ऊंट पर बनाए गए मंच से अपने खुतबे का एलान करते हुए हज़रत अली अलैहिससलाम को अपने दोनों हाथों पर उठाकर (बलन्द कर ) जो ऐलान किया :- “मन कुनतों मौला , फ हाज़ा अलीयुन मौला “ जिसका मौला मै मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम हूँ उसके यह अली मौला है । इसके साथ जो इस हदीस को सुना है वो दूसरों तक इसको पहुंचाए । “ यहाँ पर अल्लाह के रसूल मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम ने उन लोगों को खिताब किया और आने वाले लोगों तक इस पैगाम को पहुँचाने का हुक्म दिया । दूसरे अल्फ़ाज़ मे कहा जाए “ जो नबी करीम मोहम्मद मुस्तफा सल...

इस्लाम और योग

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इस्लाम और योग योग का वर्णन हिन्दू धर्म से जुड़ा है और इसका उल्लेख पतंजली दर्शन मे दिया गया है । यह कहना कि योग का किसी धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है , पूर्णतया गलत व झूठ है । इसको दुनिया भर के ईसाई , यहूदी , बौद्ध ,और अन्य लोगों को योग कराया गया और इसका प्रचार प्रसार भारतीय मीडिया के साथ विश्व मीडिया ने भी किया । जिस योग का इतना प्रचार किया जा रहा है उस योग और इस्लाम मे क्या महत्व है जिसे योग नहीं कहा गया मगर इससे बेहतर है । अल्लाह ने जब अपने दीन “इस्लाम “ को मुकम्मल किया तो इरशाद फरमाया मैंने आज दीन “इस्लाम “ को मुकम्मल कर दिया अगर किसी दीन को अल्लाह मुकम्मल करे तो उसमे कोई कमी हो ही नहीं सकती । इस्लाम मे नमाज़ से पहले जिस वज़ू का उल्लेख (ज़िक्र ) है वो नमाज़ पढ़ने से पहले किया जाता है और साथ मे दुआए पढ़ी जाती है जबकि योग बिना हाथ मुंह धोए भी की जा सकती है ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है मगर नमाज़ बिना वज़ू के कायम नहीं की जा सकती है । वज़ू मे नाक मे पानी डाला जाता है जिसे योग मे नेती क्रिया या नेती योग कहते है । योग मे अल्लाह का का ज़िक्र नहीं है जबकि वज़ू और नमाज़ योग के साथ अल्लाह का ज़िक्र है । जैस...

कयामत

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astroid के टकराने से प्रथ्वी के नष्ट होने और मानव जाति का अस्तित्व मिट जाने का यकीन कुफ्फार को भी अगर यकीन नही है तो कयामत पर कुरान मजीद में कयामत के बारे में दिया गया है " जब उसे (कयामत) को आता हुआ देखेगें तो उसे हटा भी नहीं सकेंगे। यहां पर गौर और फिक्र की बात है "पहली बात यह है कि कयामत को आता हुआ देखेगें और इसे हटा नहीं सकेंगे " 1400 साल पहले astroid और उसके टकराने को कौन जान सकता था दूसरी बात science की तरक्की का उल्लेख है जिस से यह बताया गया है कि उसे हटा पाने मे मजबूर होंगे जबकि आज के दौर मे satellite को तोड़ने वाली मिसाइल है मगर यह मिसाइल या अन्य हथियार के नकारा होने का उल्लेख किया गया है लेकिन कयामत को यकीन के साथ देखेंगें

नमाज़ ए मगफरत ए वालेदेन

नमाज़ ए मगफरत ए वालेदेन आज हम आपको नमाज़ ए मगफरत वालेदेन का तरीका बताने जा रहे है ! नमाज़ ए मगफरत वालेदेन केवल 2 रकत नमाज़ है इस नमाज़ को किसी भी वक़्त पढ़ा जा सकता है वालेदेन के इन्तेकाल के बाद किसी भी वक़त इस नमाज़ को अपने माँ बाप को हदिया कर सकते है ! नियत:- नमाज़ ए मगफरत वालेदेन पढ़ता हूँ या पढ़ती हूँ कुर्बतन इल्लाह ! पहली रकत में सुरह हम्द एक बार और दूसरी सुरह की जगह दस मर्तबा इस आयात को पढे ! . رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ रब्बाना अग्फिर ली वालेवालेदय्या वालेमोमेनीना योमा यकोमो-अल-हिसाब ! और दूसरी रकत में सुरह हम्द एक बार और दूसरी सुरह की जगह दस मर्तबा इस आयात को पढे ! رَّبِّ اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِيَ مُؤْمِنًا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ रब्बा अग्फिर ली वालेवालेदय्या वालेमन दाखाला बायतेया मोमेना वालेमोमेनीना वल मोमेनात ! फिर तशुद और सलाम के बाद 10 मर्तबा इस आयात को कहे ! رَّبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًا रब्बे अरहमहोमा कामा रब्बायानी साग़ीरा ! फिर अपने वालेदेन के लिए दुआ करे !