Ahmad Rizvi

शाह नेअमत उल्लाह वली की भविष्य वाणी

 शाह नेअमत उल्लाह वली जो सातवें इमाम मूसा काज़िम सलातो वस सलाम की नस्ल से है जिनका ताल्लुक ईरान से है उन्होंने आने वाले हालात के बारे में लगभग 800 साल पहले बता दिया था और आपकी सभी भविष्य वाणी अक्षरश: सही साबित हुई आपने 800 साल पहले चींटियों और टिड्डियों से हमले के बारे में बताया था चींटी और टिड्डी दोनों झुंड में हमला करती है दूसरी बात 800 सालों में ऐसी कोई ईजाद नहीं हुई जो अब हो चुकी है अब छोटे छोटे रोबोट और ड्रोन आ गए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने कितना पहले लोगो को बता दिया और जिन चीज़ों का वजूद भी नहीं उनके बारे में भी बताया दिया गौर करने की ज़रूरत है

इस्लाम को ऐसे भी त्यागा जा सकता है: 2

बहुत सारे ऐसे लोग गुज़र चुके है जिसके द्वारा कुरान मजीद पर तनकीद /टिप्पणी की गई या उसे अल्लाह के द्वारा नहीं उतारा गया या उसमे संशोधन की बात की गई वह सब फिर जाने वाले लोग है जिसे काफिर या इन्कार करने वाला कहते है
काफिर मुरतद मुशरीक इन सबको यह अधिकार है कि वह अल्लाह के नाजिल की गई किताबों का इन्कार करे ।मगर मुसलमान के लिए ऐसा करना रत्ती भर जाएज़ नहीं है
वसीम रिजवी हो ,या तसलीमा नसरीन हो सलमान रुशदी हो या तारिक फतेह हो या अन्य कोई हो ये सब लोग जिन्हे इस्लाम पर अल्लाह के वजूद पर ,अल्लाह के नबी पर अल्लाह की किताब पर शक है उनके लिए विकल्प या option है , वह हिन्दू बन सकते है ,ईसाई बन सकते है ,यहूदी बन सकते है ,जैन बन सकते है ,पारसी बन सकते दुनिया के किसी भी मजहब /धर्म को चुन सकते है मगर इस चुनने मे भी एक शर्त होगी और वह शर्त है उस धर्म का पालन करना पड़ेगा अगर कोई धर्म न चुनना चाहे तो उनके लिए भी एक ऑप्शन या विकल्प है कि वह कोई अल्लाह ,खुदा ,गॉड , भगवान को न मानते हुए नास्तिक या जिसे काफ़िर कहा जाता है बन सकते है वसीम रिजवी द्वारा मुसलमानो मे भेद /निफाक पैदा करने वाली बात की गई जिसमे कहा गया कि इन आयतों को खलीफा द्वारा जोड़ा गया उनके पास कोई दलील नहीं है जबकि हज़रत अली अलैहिस्सलाम के दौरे हुकूमत मे बदल दिया गया होता जबकि सब ये जानते है की मौला अली इसे हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करते,सारी कुर्बानी आपके परिवार ने इस्लाम के लिए दी है।
कुरान मजीद की एक आयत या कुछ आयत या सम्पूर्ण कुरान का इन्कार करने वाला काफ़िर ,मुनाफिक ,मुशरीक हो सकता है अगर ऐसा व्यक्ति मुसलमान है तो मुरतद हो सकता है।

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