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Ahmad Rizvi

सहाबा का एहतराम!

बिरादर मुस्लिम सवाल उठाते हैं कि सहाबा का एहतराम शिया नहीं करते कभी सवाल पूछा कि सहाबा का एहतराम कितना उस वक़्त के लोगो ने किया निम्न नज़ीर देता हूं:- 1. हज़रत अली अलैहिस सलाम अहले बैअत नबी भी है जानशीन रसूल भी है मौला भी सहाबी ए रसूल भी है हज़रत अली को रस्सी से बांधने वाले मुनाफिकों पर खामोश रहते है। नहीं बताओगे कि सहाबा का एहतराम करना चाहिए। 2. हज़रत अबुज़र गफ़ारी का नाम तो सुना होगा उनको सहाबी ही शहर बदर कर रहे सहाबी ही पिटवा रहे हैं। क्यों अब खामोश हो अब नहीं बताओगे सहाबा का एहतराम क्यों नहीं किया। 3. हज़रत हुजर बिन अदी को तशदूद करके जान से मार दिया गया सहाबा के चहीतो तुम्हारी खामोशी तुम्हारी मक्कारी को इन्क़ेशाफ़ कर रही है। सहाबा की आड़ में अहले बैअत नबी, रसूल उल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम और उनकी आले पाक मुखालफत करना है वरना सहाबा की अज़मत की बात होती अहले बैअत से लड़ने वाले मुनाफिकों के नक़ाब को उतार फेंकते उनका देफा न करते।  

जम्मू एंड कश्मीर का विभाजन और उसके लाभ:5

जम्मू और कश्मीर के कश्मीरी पंडित को जम्मूूूू और कश्मीर से बाहर निकालने वाले भूतपूर्व गवर्नर गिरीश चंद्र सक्सेना 500000 कश्मीरी पंडितोंं को शरणार्थी बननेे का प्रचार व प्रसार किया गया इसको हर चैनल पर दििखाया जाता हैं। सम्पूर्ण घाटी छावनी मे बदल जाने के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा करने मे असफल रही, राज्य का परम कर्तव्य है कि राज्य अपने नागरिकों की रक्षा करे लेकिन राज्य अपने नागरिकों की रक्षा करने मे पूर्णतया असफल रहा ये असफलता राज्य को फ़ेल स्टेट साबित करती है एक तरफ राज्य ने कश्मीरी पंडितो को उनके घरो ज़मीन जायदाद से बेदखल किया उनकी सुरक्षा करने से इंकार किया दूसरी ओर मुस्लिम नागरिकों का लाखो लोग का कत्ल किया जाना राज्य और फौज को शक के घ्रेरे मे लाता है ग़ैर मुसल्ला हथियार बंद लोगो की रक्षा करने के लिए हथियार बंद फौज , अर्ध सैनिक बल और पुलिस हिफाज़त करने मे नाकाम रही और सरकार ने अपने नागरिकों को रक्षा करने मे हथियार भी उपलब्ध नहीं कराये की नागरिक अपनी रक्षा स्वम कर सकते कुछ लोग गवर्नर गिरीश चन्द्र सक्सेना पर यह भी आरोप लगाते है कि कश्मीरी पंडितो को बाहर इसलिए निकाला ताकि मुस्लिमो का दमन कि...