Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

सऊदी शासक की जंग

यह किसने कहा कि सऊदी शासक जंग नही करते, जंग करते हैं मगर यहूद और नसारा से नही करते हैं यह जंग करते हैं सिर्फ़ और सिर्फ़ मुसलमानो से, इराक़ के मुसलमानों का क़त्लेआम कराना हो सिरिया के मुसलमानों का क़त्लेआम कराना हो अफ़्गानिस्तान के मुसलमानों का क़त्लेआम कराना हो 15 मुल्को को साथ लेकर यमन के मुसलमानों का क़त्लेआम कराना हो सऊदी शासक आगे आगे, यहूद और नसारा से लड़ना हो तो भीगी बिल्ली बन जाते हैं तमगा उस पर यह है कि खादिमैन हरिमैन शरिफ़ैन है कहने का अर्थ है कि अगर यह कुफ़्फ़ार के साथ भी हो तो जायज़ है क्योंकि खादिमैन है हरिमैन और शरिफ़ैन के

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