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जून, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ahmad Rizvi

सिद्धांतवादी पार्टी कोई नही सिर्फ़ एक को छोड़कर

यह त्रणमूल कांग्रेस हो कांग्रेस हो शिवसेना हो या कोई अन्य पार्टी हो इनके कोई सिद्धांत है ही नही सिद्धांत अगर है तो वो है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उनको हिन्दू राष्ट्र बनाने और बाकि अक़्लियतो को आर्थिक समाजिक धार्मिक रूप से कंगाल बनाने का नज़रिया है और इसके लिए उसके पास करोडो लोग है उसके कार्यकर्ता प्रधानमंत्री ग्रहमन्त्री लोकसभा के स्पीकर रक्षा मंत्री से लेकर राज्यो के मुख्यमंत्री  और अधिकतर मंत्री और विधायक और सांसद है आर एस एस के कार्यकर्ता दूसरी पार्टी मे होने के बावजूद वो आर एस एस के प्रति वफ़ादार है यहां तक कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायापालिका मे भी उसके कार्यकर्ता पहुंच चुके है जो संविधान के प्रति वफ़ादार नही है बल्कि वो अपने संघठन और उसके चीफ़ के प्रति वफ़ादार है इसलिये जब कभी किसी व्यक्ति के साथ ज़ुल्म या ज़्याद्ती होती है या बेइमानी की जाती है उसमे हिन्दू राष्ट्र और आर एस एस की मुसलमानों और ईसाईयों के प्रति नफ़रत के कारण होता है अब सिद्धान्त वाली बात तो किसी पार्टी मे कोई सिद्धांत नही है आर एस एस मे सिद्धांत है वो हिन्दू राष्ट्र बनाने का और मुसलमानों पर अत्याचार करने उनकी जायद...

सिद्धांतवादी पार्टी कोई नही सिर्फ़ एक को छोड़कर

यह त्रणमूल कांग्रेस हो कांग्रेस हो शिवसेना हो या कोई अन्य पार्टी हो इनके कोई सिद्धांत है ही नही सिद्धांत अगर है तो वो है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उनको हिन्दू राष्ट्र बनाने और बाकि अक़्लियतो को आर्थिक समाजिक धार्मिक रूप से कंगाल बनाने का नज़रिया है और इसके लिए उसके पास करोडो लोग है उसके कार्यकर्ता प्रधानमंत्री ग्रहमन्त्री लोकसभा के स्पीकर रक्षा मंत्री से लेकर राज्यो के मुख्यमंत्री  और अधिकतर मंत्री और विधायक और सांसद है आर एस एस के कार्यकर्ता दूसरी पार्टी मे होने के बावजूद वो आर एस एस के प्रति वफ़ादार है यहां तक कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायापालिका मे भी उसके कार्यकर्ता पहुंच चुके है जो संविधान के प्रति वफ़ादार नही है बल्कि वो अपने संघठन और उसके चीफ़ के प्रति वफ़ादार है इसलिये जब कभी किसी व्यक्ति के साथ ज़ुल्म या ज़्याद्ती होती है या बेइमानी की जाती है उसमे हिन्दू राष्ट्र और आर एस एस की मुसलमानों और ईसाईयों के प्रति नफ़रत के कारण होता है अब सिद्धान्त वाली बात तो किसी पार्टी मे कोई सिद्धांत नही है आर एस एस मे सिद्धांत है वो हिन्दू राष्ट्र बनाने का और मुसलमानों पर अत्याचार करने उनकी जायद...

हिज़बुल्लाह इस्राइल और आतंक

इस्राइल : जर्मनी और दुनियाभर से लाये गये यहूदीयों को फ़िलिस्तीन मे लाया गया अमेरिका ब्रिटेन फ़्रान्स रुस आदि देशो ने यहूदीयों को हथियार दिया जिससे फ़िलिस्तीनीयों का क़त्ले आम किया गया और आतंक के बल पर इस्राइल देश को बनाया गया जिसका संरक्षण वीटो ताक़त वाले देश अमेरिका ब्रिटेन फ़्रान्स और रुस करते रहे हैं यहां विशेष बात यह है कि इस्राइल आतंकवादी से एक देश बन गया और अब इस्राइल का आतंक एक देश के कानूनी जामा पहने हुवे हो गया | अब जब अन्य देश आतंकवाद के खिलाफ़ बोलते हैं तो वो फ़िलिस्तीन द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ़ बोलते है लेकिन इस्राइल के बड़े से बड़े आतंक पर चुप्पी बनाये रहते हैं कारण राज्य के द्वारा किया गया कार्य कानूनी सम्मत समझा जा रहा है | सिरिया : सिरिया के मोहम्मद अल जोलानी का उदाहरण लेते है जो अमेरिका के निगाह मे घोषित ईनामी आतंकवादी थे कब तक थे?  जब तक उनके हाथ मे सत्ता नही आ गई और अमेरिका और इस्राइल के हितो मे काम नही करने लगे जैसे ही अमेरिका और इस्राइल के लिये काम करने लगे वो मोहम्मद अल जोलानी आतंकवादी से प्रेसीडेन्ट अहमद अल शरा बन गये | यहाँ यह लिखने का मुख्य उद्देश्य यह है कि ह...

पहला मुनाफिक - इबलीस

  पहला मुनाफिक – इबलीस मुनाफिक के मायने है दोगला , ढोंगी , कपटी वो शख्स जो ज़बान से कुछ और हो और दिल मे कुछ और । इबलीस (शैतान) मलायका के सफ़ों मे पहुँच गया । हज़रत आदम के पुतले और रूह को स्थापित करने तक मे इबलीस के मुनाफिक होने और काफिर होने को अल्लाह सुभान व तआला ने सामने ले आया । लौह-ए-महफ़ूज़ मे फरिश्तों मे एक नाफरमान होने का ज़िक्र किया गया तब तक यह इल्म अल्लाह से मलायका के बीच मे आ   गया तुम मे से एक नाफरमान होगा इस मुनाफ़क़त को अल्लाह रब्बुल आलमीन ने बता दिया एक बात और इस मुनाफिक और   अल्लाह के रसूल की बज़्म मे बैठने वाले मुनाफिको के बारे मे भी अल्लाह को पता है और सूरे मुनाफिक मे उनका ज़िक्र भी कर दिया यह मुनाफिकत का राज कब खुलेगा आगे देखिए जब तक आदम का पुतला बना गया इबलीस की मुनाफ़क़त नहीं खुलती है जैसे ही रूह को फूंकने के साथ सजदा मे चले जाने का हुक्म फरिश्तों को दिया गया सभी फ़रिश्ते सिर्फ इबलीस को छोड़कर सजदे मे चले गए और इस इनकार का अंजाम शैतान को फटकार और लानत के रूप मे तोहफा मिला । अब इबलीस मुनाफिक से सीधा काफिर हो गया । एक बात और तौहीद वालों के लिए इबलीस तौहीद का इनका...

जंगबंदी और अमेरिका इस्राइल

अमेरिका और इस्राइल : ने मिलकर साज़िश रची जिसमे लेबनान के ईसाई राष्ट्रपति भी शामिल हुवे और हिज़बुल्ला को नेस्त नाबूद की योजना बनाई ईरान को जंगबन्दी का लालीपोप दिया उधर ईरान की नाकाबंदी की और इधर इस्राइल को हिज़बुल्ला पर हमले को हरी झंडी दे दी इसलिए की ईरान के बाज़ूओ को काटा जाये | जंगबन्दी की आड़ मे भी जंग जारी है जंग का रूप बदला है | अमेरिकी बुज़दिल जंग से ज़्यादा मक्कारी पर ज़्यादा तवज्जो देते है  जब लेबनान के कुछ गददार लीडरो और इस्राइल के हिमायतीयों के बीच चर्चा हो रही थी कि हिज़बोल्ला को और उसके अस्लहे को कैसे तबाह किया जाये फ़्रान्स और इस्राइल नवाज़ ईसाई राष्ट्रपति जो इस्राइल के लिये काम कर रहा है इस्राइल से साँठ गाँठ करके हिज़्बोल्ला के खिलाफ़ मोर्चा खुलवाया है और इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि ईसाई और मुसलमानों के बीच खानाजंगी न होने लगे यह खौफ़ यूरोपी ईसाईयों को भी है इन सबसे बेपरवाह होते हुवे अमेरिका इस्राइल ने मिलकर बहुत बडी खौफ़नाक साजिश रची है इस्लाम को मिटाने का जो बीडा 1400 साल पहले यहूदी और ईसाईयों ने रची थी जब अल्लाह के नबी के खिलाफ़ एक लाख फ़ौजो को लेकर चढाई की थी रोम वालो ने...