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Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

भूकम्प (ज़लज़ला)

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               भूकम्प (ज़लज़ला) सूरे ज़िलज़लाह  आयत संख्या 1 :  “ इज़ा ज़ुलज़लाती अर्ज़ ज़िलज़लाह ” जब ज़मीन ज़ोरों से हिला दी जाएगी । कुरान मजीद हर दौर (सब ज़माने/ वक़्त/ युग ) के लिए है भूकम्प या ज़लज़ला के बारे मे जैसा कुरान हकीम मे उल्लेख किया गया है वैसा कहीं और नहीं है पिछले दौर मे भूकम्प आए होंगे हाल मे भी भूकंप आते है और आने वाले समय मे भी भूकम्प आएंगे लेकिन जिस दौर के भूकम्प का जिक्र किया जा रहा है उस के बारे मे आगे आयत बता रही है कि ज़मीन खज़ाने (लफ़्ज़ अखरज़ात का जिक्र किया जिसका अर्थ है खर्च होने वाली चीजे का निकलना जैसे कोयला गैस पेट्रोल डीज़ल सोना कोबाल्ट आदि) उगल देगी । उस वक़्त के ज़मीन के ज़ोरों से हिला देने का जिक्र किया गया है । ज़मीन के हिलाने का ज़िक्र जो किया गया है उसमे यह नहीं कहा गया है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के हुक्म से भूकम्प आएगा मलाएका या जिन्न  के कारण आएगा या आदमी के द्वारा बनाए गये असलहे के कारण होगी इन सब से भूकम्प या जलजला आ सकता है लेकिन सच्ची किताब ने आने वाले वक़्त मे जो जिक्र किया है उसे आज की दुनिया मे समझा जा सकता ह...

नबी के साथी और मुखालिफ कौन है ?

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नबी के साथी और मुखालिफ कौन है ? कुरान हकीम हिकमत से भरा है नबी मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के साथ कौन है और नबी का मुखालिफ कौन है ? कुरान मजीद मे इस सम्बन्ध मे बहुत आसान तरीका दिया गया है जिससे नबी करीम  मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के दौर से लेकर कयामत तक के लोगों को समझा जा सकता है कुरान मजीद के सूरा फतह (48) की आयत संख्या 29 मे दिया गया है “ मोहम्मद (सलल्लाहों अलैह व आले वसल्लम) अल्लाह के रसूल है और जो लोग उनके साथ है काफिरों पर बड़े सख्त और आपस मे बड़े रहम दिल है तू उनको देखेगा (कि खुदा के सामने) झुके (रुकु) सरबसूजूद है खुदा के फ़ज़ल और उसकी खुशनुदी के ख्वास्तगार है कसरत सुजूद के असर से उनकी पेशानियों पर घटटे पड़े हुवे है यही औसाफ उनके तौरात मे भी है और यही हालात इंजील मे ज़िक्र किया गया है ! गोया वो एक ऐसी खेती है कि जिस ने अपनी मोटी सुई निकाली फिर उसी सुई को मज़बूत किया तो मोटी हुई फिर अपनी जड़ पर सीधी खड़ी हो गई और अपनी ताज़गी से किसानों को खुश करने लगी ताकि उनके ज़रिए काफिरों को जी जलाए जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे खुदा ने उनसे बख्सीश और अजरे अ...

पत्रकारिता (सहाफ़त) की आड मे जासूसी

  अफ़्गनिस्तान :  मे रशीद दोस्तम को क़ातिल एक पत्रकार बनकर आया और क़त्ल कर दिया | ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई को स्पीच देने के दौरान किसी नामालूम सहाफ़ी ने बम नस्फ़ कर दिया था जिसमे आपका एक हाथ माज़ूल हो गया था |  ईरान : मे यहूदी महिला जासूस ने सहाफ़ी बनकर किस तरह अपने ताल्लुक़ात को कायम किया कि तमाम फ़ौजी जनरलो के साथ साथ सुप्रीम लीडर से भी मुलाक़ात की और तमाम फ़ौजी जनरलो की सूचना और पते मोसाद और इस्राइल को पहुंचाती रही | लगातार इस्राइल सहाफ़ीयों का क़त्ल कर रहा है उसका मुख्य कारण यह है कि इस्राइल खुद अपने जासूसो को सहाफ़ी बनाकर भेजता है और दुनिया भर के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल वो जासूसी के लिए करता है और जहां इस्राएल नही पहुंच पाता है वहां  अपने दोस्त देशो के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल करता है  हाल ही मे अपने देश भारत मे भी सहाफ़ी और यूटयुबर ज्योति मेहरोत्रा को जासूसी के आरोप मे गिरफ़्तार किया गया | इस्राइल के जासूसो को अगर पकड़ना है तो इस्राइल समर्थक सहाफ़ीयों पर कडी नज़र रखनी होगी!