Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

इस्लामिक नाटो या इसराइल के खिदमतगार

हाल ही में तुर्की पाकिस्तान सऊदी अरब ने सुरक्षा पैक्ट किया है किसी एक देश में हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा।

ऐसा लोगो में भय पैदा कर रही है कि भारत के लिए बड़ा खतरा है या तुर्की की आर्मेनिया और ग्रीस से टकराव है और सऊदी अरब का यमन के अंसारउल्लाह से टकराव है।

इस गठबंधन से जिन देशों को खतरा उत्पन्न हुआ वो भारत आर्मेनिया ग्रीस साइप्रस और यमन को ले लेते है।

क्या यह इस्लामिक गठबंधन है या इस्लामिक गठबंधन के नाम पर यहुदी और अमेरिका उसके सहयोगी देशों को लाभ पहुंचाना है।

तुर्की के विदेश मंत्री का यह आश्वस्त करना कि यह गठबंधन इसराइल और ईरान के खिलाफ नहीं है?

इसको समझते है 07 अक्तूबर 2023 के बाद से फिलिस्तीनीयों के कत्ले आम के बाद तुर्की पाकिस्तान और सऊदी अरब ने कोई सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया हां अगर कोई मजबूती से काम किया गया है तो वो है बयानबाज़ी, बयानबाजी मे किसी तरह की कोई कमी नहीं की गई। इसराइल को आश्वस्त कर दिया गया।

अब ईरान की बात आयी ईरान को भी आश्वस्त किया लेकिन साथ में यमन के खिलाफ कार्यवाही करने के इमकान है।

अब अमेरिकी साज़िश और उसके इन आलाकारों को समझते है:-

1. हिजबुल्लाह को निशस्त्र करना है जिसमें लेबनान के औन अमेरिका और इसराइल का साथ दे रहे हैं।

2. इराक में हशदुल शाबी या पी एम एफ को असलहा विहीन बनाने के लिए इराक के प्रधानमंत्री को अमेरिका समझा रहा है।

3. यमन के अंसार उल्लाह को खत्म करने के लिए तीनों मुनाफ़किनो को अमेरिका और उसके इशारा पर यह गठबंधन किया गया।

यह सारी चीज़े ईरान के खिलाफ़ की जा रही है और ईरान को धोखा देने की कोशिश की जा रही है कि ईरान के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हैं।

अब तक इन तीनों देशों ने तुर्की पाकिस्तान सऊदी अरब ने बहुत खिदमत की है और अमेरिका के लिए अब ईरान के खिलाफ खिदमत को अंजाम देने के लिए तैयार है।

1. सऊदी अरब डॉलर के कारोबार को करके अमेरिका और इसराइल की भरपूर खिदमत की है।

2. ईरान में आये इस्लामिक क्रांति को कुचलने के लिए अमेरिका का भरपूर साथ दिया ईरान इराक़ जंग में बड़ा सहयोगी रहा।

3. कुवैत में इराक़ के कब्जे के बाद अमेरिका और उसके इत्तेहादियों की भरपूर मदद की लाखों मुसलमानों को क़त्ल कराने में सऊदी की बड़ी अहम भूमिका रही।

4. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अमेरिका के मंसूबों को पूरा करने के लिए 1979 ,1996,2001 में बहुत बड़ा सहयोग किया है और लाखों अफगानों के क़त्ल में सहयोग किया।

5. तुर्की नाटो का सदस्य है और ईरान पर हमले के लिए बनाई गई आई एस आई एस को तुर्की की सरजमींन से आई एस आई एस आतंकवादियों को ठहरने खाने और घुसपैठ करने में तुर्की ने मदद की और ईरान पर हमले की साज़िश में शामिल रहा है।

अब इसराइल के इशारे पर इस गठबंधन के असल इरादे से ध्यान हटाने के लिए भारत पर बड़ा खतरा है या ग्रीस साइप्रस पर खतरा है ऐसा कुछ नहीं है इन देशों की औकात अमेरिका और इसराइल की बूट लिकिंग करने की है। इनकी औकात को समझना है तो यहीं से समझा जा सकता है कि यहूदी फिलिस्तीनियों का क़त्ल करते रहे और यह देश बयान देते रहे।



 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इंजील मे इमाम हुसैन का ज़िक्र

गोग और मगोग (याजूज और माजूज)

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम