Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

ज़ियारते मक़ामात मुक़द्दसा ईरान / ZIYARATE MAQAMATE MUQADDASA IRAN

 


कुम/qum: रौजा अकदस  मासूमा  कुम हज़रत फातिमा बिन्ते  इमाम मूसा काज़िम अलैहिस सलातों वस सलाम ख्वाहर (भाई )इमाम अली रज़ा अलैहिस सलातों वस सलाम

कुम मे  मस्जिद जमकारान मनसूब ब इमाम ज़माना अजलल्लाहो तआला व फ़रजहूम

 तेहरान : 1. ज़ियारत बीबी शहर बानो  2. आस्ताना  बीबी ज़ुबैदा 3. मकबरा शाह अब्दुल अज़ीम जिसमे तीन इमाम ज़ादों यानी जनाब ताहिर बिन इमाम ज़ैनुल आबदीन अलैहिस सलातों वस सलाम  व शाह हमज़ा बिन इमाम मूसा काज़िम अलैहिस सलातों वस सलाम  और इमाम हसन अलैहिस सलातों वस सलाम की औलादों मे शाह अब्दुल अज़ीम की आराम गाहे  मौजूद है । 4. कब्र रहबरे इन्किलाब आयतुल्लाह रूहउल्लाह खुमैनी अला रहमा

मशहद मुक़द्दस : इमाम हज़रत अली रज़ा अलैहिस सलातों वस सलाम के मज़ार मुक़द्दस की ज़ियारत

नेशापुर : चश्मा व कदमगाह इमाम हज़रत अली रज़ा अलैहिस सलातों वस सलाम 2. मकबरा इमाम ज़ादा मोहम्मद महरूफ़ अला रहमा और इमाम ज़ादा इब्राहीम बिन इमाम हज़रत मूसा काज़िम अलैहिस सलातों वस सलाम की ज़ियारत      

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