Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

डॉलर का पतन /dollar ditching

 


दुनिया मे हमेशा यह कहा जाता है कि उस देश का सिक्का चलता है । सिक्का चलने का मतलब यह है कि उस देश का दबदबा अन्य देश पर होता है द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नसलपरस्त ब्रिटेन के खात्मे के साथ जाहिरी तौर पर तो ऐसा लगा कि उसका सूरज गुरूब (डूबना) हो गया मगर इस नस्ल परस्त ब्रिटेन की औलादे दीगर मुल्क मे बस चुकी थी जैसे यूनाइटेड स्टेट अमेरिका ऑस्ट्रेलिया आदि दुनिया को अपने इजारेदारी या dominion मे रखने के लिए जो निजाम बनाया गया उसमे अन्तराष्ट्रीय इदारे (संस्था) जो  लिए यूनाइटेड स्टेट अमेरिका ऑस्ट्रेलिया ब्रिटेन फ्रांस रूस के लिए काम करेंगे दूसरा था दुनिया था दुनिया की मईसत/economics पर कब्जा करना इस निजाम मे “अमेरिकी डॉलर” को मान्यता मिली और इसके ज़रिये अमेरिका ने ज़रे मुबादला और व्यापार के द्वारा बेइंतेहा दौलत को कमाया और इसके द्वारा ही उसने अमेरिकन डॉलर को हथियार के रूप मे इस्तेमाल किया और प्रतिबंध लगाया।

हालिया युक्रैन जंग के बाद रशियन फेडरेशन पर जो प्रतिबंध लगाए गए और उसका जिस तरह से रशिया ने जवाब दिया है उसके बाद से “डॉलर” की जो स्थिति दुनिया मे थी वो अब कायम नहीं रह पाएगी।

अमेरिका के rival देशों का जो गठबंधन है जैसे रूस,चीन,ईरान,सीरिया ,उत्तरी कोरिया ,मध्य एशिया के देश जिन्होंने डॉलर मे व्यापार करने से इनकार कर दिया अब इनका व्यापार रूबल और येन मे होगा ।

सबसे पहले अमेरिकी डॉलर को बाहर करने मे इराक ने किरदार अदा किया और यूरो मे व्यापार करने लगा मगर यह प्रयास तो था मगर नाकाफ़ी था ।

प्रतिबन्धों से घिरा देश ईरान जिसने जराये मुबादले मे अपनी currency मे व्यापार करना आरम्भ किया ईरान की यह पहल बहुत हद तक कामयाब हो गयी। अब डॉलर को तबाह करने के लिए रूस चीन उत्तरी कोरिया सीरिया ईरान इराक soviet Russia से अलग हुए देश वेनिजुएला आदि ने जो कदम उठाया है वह सराहनीय है ।

अमेरिका डॉलर के जवाब मे रूबल और येन के द्वारा अमेरिका की मईसत /economics को चोट पहुंचाने वाला बहुत बड़ा कदम है आने वाले समय मे रूस और चीन और अन्य देशों का यह प्रयास अमेरिका के ताबूत मे आखिरी कील साबित होगा ।

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