Ahmad Rizvi

जवाबदेही/उत्तरदायी/accountability

                   जवाबदेही/उत्तरदायी/ accountability आज़ाद भारत और राजशाही मे अन्तर क्या है जब दोनों मे अधिकारीयों या नौकरशाह की मनमानी पर अंकुश ही न हो जब अदलिया सुनववाई करने से सीधा मना कर दे या यह कहे कि उसके पास इसके सुनने का समय ही नहीं है या राजा की मंशा के अनुसार काम करे और न्याय का गला घोंट दे तानाशाही राजशाही और लोकतंत्र मे अन्तर रह ही नहीं जाता जब जवाबदेही निर्धारित न हो फिर राजशाही और लोकतंत्र मे अन्तर सरकार चुनने का है और कोई अन्तर नहीं है । आज जब देखते है तो किसी आवेदन पत्र सदेश को लेने से इंकार कर दिया जाता है इसे आप छोड़ जाओ इस पर कोई प्राप्ति नहीं देंगे । डाकिया अपनी ड्यूटी से बचने के लिए अक्सर व्यक्ति मिला नहीं डाक वापस थाने मे आवेदन पत्र को पहले लेकर उसमे तोल मोल होता है तोल मोल होने के बाद प्राथीमिकी दर्ज की जाती है । आला अधिकारी से शिकायत के बाद भी दरोगा जी शिकायतकर्ता को धमकाते है और एफ आई आर दर्ज नहीं करते सरकारे क्राइम को कम करके बताती है कि उनका शासन बहुत बढ़िया है थाने मे लोगो...

पहला मुनाफिक - इबलीस


 

पहला मुनाफिक – इबलीस

मुनाफिक के मायने है दोगला , ढोंगी , कपटी वो शख्स जो ज़बान से कुछ और हो और दिल मे कुछ और ।

इबलीस (शैतान) मलायका के सफ़ों मे पहुँच गया । हज़रत आदम के पुतले और रूह को स्थापित करने तक मे इबलीस के मुनाफिक होने और काफिर होने को अल्लाह सुभान व तआला ने सामने ले आया । लौह-ए-महफ़ूज़ मे फरिश्तों मे एक नाफरमान होने का ज़िक्र किया गया तब तक यह इल्म अल्लाह से मलायका के बीच मे आ  गया तुम मे से एक नाफरमान होगा इस मुनाफ़क़त को अल्लाह रब्बुल आलमीन ने बता दिया एक बात और इस मुनाफिक और  अल्लाह के रसूल की बज़्म मे बैठने वाले मुनाफिको के बारे मे भी अल्लाह को पता है और सूरे मुनाफिक मे उनका ज़िक्र भी कर दिया यह मुनाफिकत का राज कब खुलेगा आगे देखिए जब तक आदम का पुतला बना गया इबलीस की मुनाफ़क़त नहीं खुलती है जैसे ही रूह को फूंकने के साथ सजदा मे चले जाने का हुक्म फरिश्तों को दिया गया सभी फ़रिश्ते सिर्फ इबलीस को छोड़कर सजदे मे चले गए और इस इनकार का अंजाम शैतान को फटकार और लानत के रूप मे तोहफा मिला । अब इबलीस मुनाफिक से सीधा काफिर हो गया । एक बात और तौहीद वालों के लिए इबलीस तौहीद का इनकार नहीं कर रहा है अल्लाह का सजदा करने से इनकार नहीं कर रहा है ।

अब सूरे मुनाफिक मे गौर करे और कयामत तक के मुनाफिक और काफिरों की पहचान को बताया गया है यह मुनाफिक आपकी  रसूल अल्लाह होने की गवाही देते है लेकिन यह दिल से स्वीकार नहीं करते है अब यह दिल से न स्वीकार करने को कहाँ से देखा जा सकता है तो जिस तरह इबलीस ने अल्लाह के हुक्म का इंकार किया उसी तरह रिसालत माब सल्लल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के हुक्म का इंकार करना है जब तक हुक्म का इनकार नहीं करते है तब तक मुनाफिक है और जब हुक्म का इंकार कर दिया या मुखालफत की ,मुखालफत और इंकार के साथ काफिर हो गये ।

एक और हदीस की ओर इशारा करता चलूँ तफ़सील से नहीं लिख रहा हूँ अक्लमंद के लिए इशारा काफी है ।

कोई व्यक्ति दिन रात नमाज़ पढ़ता हो रोज़े रखता हो काबे के दरम्यान मज़लूमीयत की हालत मे कत्ल किया जाए और वो बुगज ए अली रखता हो वो जहन्नमी है ।

इस पर इबलीस को ही दलील के रूप मे ले लो अल्लाह की तौहीद को मान भी रहा है सजदे भी कर रहा है इसके बाद आदम का बुगज उसे कहाँ से कहाँ ले गया , इस दलील से समझा जा सकता है ।    

 

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