Ahmad Rizvi

तुर्की

 अभी हाल ही में यह सुनने में आया है कि एक नाटो टाइप का संगठन मुस्लिम देशों में बना है जिसमें तुर्की सऊदी अरब और पाकिस्तान शामिल हो चुके हैं आने वाले समय में आने वाले समय में बांग्लादेश भी इसमें शामिल हो रहा है तुर्की भारत के खिलाफ किस तरीके का एकदाम कर रहा है इसको समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना चाहिए जब भारत के प्रधानमंत्री ने इजरायल के साथ मिलकर मिलकर साइप्रस को समर्थन देना शुरू किया और ग्रीस को समर्थन देना शुरू किया और आर्मेनिया को हथियारों की सप्लाई करना शुरू किया यह कैसा गठबंधन इसराइल के साथ मिलकर भारत ने बनाया है जिसमें तुर्की की कमर तोड़ने का प्लान अब तुर्की ने भी काफी समय बिताने के बाद भारत के खिलाफ भी पाकिस्तान के साथ मिलकर संकट जो बनाया यह कितना कामयाब होगा या कितना नाकामयाब होगा यह आने वाला समय बताएगा लेकिन हर एक चल के बाद दूसरी चाल चली जा रही है हमारे विश्व गुरु का सारा खेल जो है उसमें अहम रोल यह होता है कि मुसलमान को किस तरह बर्बाद और तबाह किया जाए इसके लिए वह बहुत दूर तक जा सकते  है उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड देखा जाए जिसमें गुजरात में मुस्लिम नरसंहार के बारे मे...

पहला मुनाफिक - इबलीस


 

पहला मुनाफिक – इबलीस

मुनाफिक के मायने है दोगला , ढोंगी , कपटी वो शख्स जो ज़बान से कुछ और हो और दिल मे कुछ और ।

इबलीस (शैतान) मलायका के सफ़ों मे पहुँच गया । हज़रत आदम के पुतले और रूह को स्थापित करने तक मे इबलीस के मुनाफिक होने और काफिर होने को अल्लाह सुभान व तआला ने सामने ले आया । लौह-ए-महफ़ूज़ मे फरिश्तों मे एक नाफरमान होने का ज़िक्र किया गया तब तक यह इल्म अल्लाह से मलायका के बीच मे आ  गया तुम मे से एक नाफरमान होगा इस मुनाफ़क़त को अल्लाह रब्बुल आलमीन ने बता दिया एक बात और इस मुनाफिक और  अल्लाह के रसूल की बज़्म मे बैठने वाले मुनाफिको के बारे मे भी अल्लाह को पता है और सूरे मुनाफिक मे उनका ज़िक्र भी कर दिया यह मुनाफिकत का राज कब खुलेगा आगे देखिए जब तक आदम का पुतला बना गया इबलीस की मुनाफ़क़त नहीं खुलती है जैसे ही रूह को फूंकने के साथ सजदा मे चले जाने का हुक्म फरिश्तों को दिया गया सभी फ़रिश्ते सिर्फ इबलीस को छोड़कर सजदे मे चले गए और इस इनकार का अंजाम शैतान को फटकार और लानत के रूप मे तोहफा मिला । अब इबलीस मुनाफिक से सीधा काफिर हो गया । एक बात और तौहीद वालों के लिए इबलीस तौहीद का इनकार नहीं कर रहा है अल्लाह का सजदा करने से इनकार नहीं कर रहा है ।

अब सूरे मुनाफिक मे गौर करे और कयामत तक के मुनाफिक और काफिरों की पहचान को बताया गया है यह मुनाफिक आपकी  रसूल अल्लाह होने की गवाही देते है लेकिन यह दिल से स्वीकार नहीं करते है अब यह दिल से न स्वीकार करने को कहाँ से देखा जा सकता है तो जिस तरह इबलीस ने अल्लाह के हुक्म का इंकार किया उसी तरह रिसालत माब सल्लल्लाहों अलैह व आले वसल्लम के हुक्म का इंकार करना है जब तक हुक्म का इनकार नहीं करते है तब तक मुनाफिक है और जब हुक्म का इंकार कर दिया या मुखालफत की ,मुखालफत और इंकार के साथ काफिर हो गये ।

एक और हदीस की ओर इशारा करता चलूँ तफ़सील से नहीं लिख रहा हूँ अक्लमंद के लिए इशारा काफी है ।

कोई व्यक्ति दिन रात नमाज़ पढ़ता हो रोज़े रखता हो काबे के दरम्यान मज़लूमीयत की हालत मे कत्ल किया जाए और वो बुगज ए अली रखता हो वो जहन्नमी है ।

इस पर इबलीस को ही दलील के रूप मे ले लो अल्लाह की तौहीद को मान भी रहा है सजदे भी कर रहा है इसके बाद आदम का बुगज उसे कहाँ से कहाँ ले गया , इस दलील से समझा जा सकता है ।    

 

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