Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

                                                                   हस्बुनाह किताबउल्लाह अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अप...

दुजैल का ट्रायल ही क्यों ?

 

मसलकी नफरत मे मुसलमान इतना गिरफतार है कि वह अपनी अक्ल की सालाहीयत खो चुका है और उसका कार्य एक अज्ञानी (जाहिल/ignorant) की तरह का हो गया। जिस सद्दाम हुसैन को अमेरिका और उसके साथी पश्चिमी देशों और सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ काम करने मे इस्तेमाल किया था और जिस दौरान इराक - ईरान युद्ध (1980-1988)चल रहा था उसी दौरान इराक के एक गाँव दुजैल मे सद्दाम पर हमला होता है और उसके बदले मे इराक़ी शियों का कत्ले आम किया जाता है यह बात है सन 1982 ईसवी की ।

 अमेरिका उस समय इराक के शासक सद्दाम हुसैन का बडा समर्थक और दोस्त बना हुआ था लेकिन उस दोस्ती मे भी दगा के निशान अमेरिका के पास थे कत्लेआम का वीडियो अमेरिका के पास था अमेरिका और पश्चिमी देशो को अपना उद्देश्य पूरा कराना था । 2 अगस्त 1990 मे इराक ने कुवैत पर आक्रमण करके उस पर कब्जा कर लिया । खाड़ी युद्ध मे सीज़ फायर (युद्ध विराम) के बाद कुवैत को आज़ाद करा लिया गया। उसके बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इराक पर आरोप लगाना शुरू किया कि इराक के शासक सद्दाम इराक़ी कुर्द और शियाओ पर ज़ुल्म ढ़ा रहे है उनके ऊपर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे है ।

सन 2003 के इराक युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने सद्दाम को पदच्युत कर दिया और उनको गिरफ्तार करने के बाद उनपर इराक़ी कोर्ट मे केस चलाया गया यह मुकदमा सन 1982 के दुजैल कांड का ट्रायल था ।

आइये जानते है दुजैल कांड के अलावा जो कांड थे उस पर मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया ?

1.   जैसे इराक ने पश्चिमी देशों और अमेरिका के द्वारा उपलब्ध कराये गए हथियार के द्वारा जिसमे ईरान के हलबचा नामी जगह पर लगभग 10,000 आदमी औरत बच्चे लुकमे अजल का शिकार हो गए , बेदर्दी से कत्ल किया गया।

2.   कुवैत पर हमला किया इस हमले मे दुजैल से भी ज्यादा लोगों को कत्ल किया गया उस पर ट्रायल नहीं किया गया ।

3.   इराक मे कुर्दों और शियाओ पर केमिकल हथियार चालाने और उनके दमन का आरोप पश्चिमी देशों ने लगाया मगर इस आधार पर ट्रायल नहीं कराया गया ।

ट्रायल किया गया तो दुजैल पर वो भी सन 1982 मे किए गए कार्य के लिए इससे अमेरिका ने अपने उद्देश्य की पूर्ति करनी चाही एक दुजैल के ट्रायल से शिया और सुन्नी मसलकों मे खूँरेजी कराना था दूसरे इनकी नफरत को इतना बढ़ाना था ताकि पश्चिमी देशों के मक़ासिद बगैर ज़्यादा मेहनत के सफल हो जाए मगर अल्लाह के रहमो करम से अमेरिका और उसके पश्चिमी देश नाकामयाब रहे मगर अभी भी उनके प्रयास जारी है और आगे भी जारी रहेगा ।

“किसी कौम से इतनी नफरत न करो कि तुम अदल से फिर जाओ”



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