किरदार कुशी
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इस्लाम के कुछ फ़िरक़ो मे यह कहते सुना गया है कि अरब के लोगो को बुरा मत् कहो इस पर दलील दी जाती है अल्लाह के नबी सल्लल्लहो अलैह व आले वसल्ल्म उस सर ज़मीन पर नमुदार हुए इसलिए अरबो को बुरा मत् कहो
क़ुरान पाक की सुरे मसद 111 मे ' तब्बत यदा अबी लहीबीऊँ ' अबु लहब के हाथ टूट जाए क्या अबू लहब अरब नहीं था या मकका के अन्य कुफ्फार अरब नहीं थे बद्र की जंग में मारा जाने वाला उमैय्या ,अबू जहल मुआविया यज़ीद सब अरब थे कु़रान मजीद में शख्शियत के किरदार इमान पर फज़ीलत है या लानत है किसी क्षेत्र या किसी नस्ल रंग का इम्तियाज़ नहीं किया गया ।इम्तियाज़ का मेयार जो रखा गया वो है तौहीद ,रिसालत ,आले मोहम्मद से मोअददत है।
लिहाज़ा यह कहना कि अरब का चोर, बदमाशों, ज़िनाकार, बदकार ,का़तिल, खूनी, भी लाइकेन ताज़ीम है कयोंकि अरब है तो यह झूठ है और अल्लाह के अदल के निज़ाम के खिलाफ है।
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