Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

मुसलमानों पर इलज़ाम

मुसलमानों पर एक इल्ज़ाम यह लगा दिया गया वहाबीयो और ब्रिटिश एजेन्टो के द्वारा कि मुसलमान क़ब्र की इबादत करते है और यह जवाज़ बनाया गया 1932 मे वह भी आले रसूल के मुक़देसात तोड़ने के लिये अब मेरा सवाल है इसका मतलब 1300 साल तक मुसलमान क़ब्र पुज्जू रहे जबकि ला इलाहा इल्लललाह को फ़ैलाया ही गया था मुसलमानों के द्वारा, फ़िर ब्रिटिश और सउद ने मिल कर मुसलमानों पर उसी इल्ज़ाम को चस्पा किया जिसकी मुसलमान मुखालफ़त करता आ रहा था

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