Ahmad Rizvi

न्याय से उठता विश्वास

भारत के मुख्य न्यायाधीश का यह कहना ज्ञापन के स्थान पर याचिका दाखिल करे और कानून के अनुसार न्याय दिया जायेगा, पहली बात मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के दुरुपयोग और करोड़ों लोगों के वोटर लिस्ट से बाहर किया गया है, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग विपक्ष कर रहा है। सवाल पैदा होता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अगर मुकदमा न्यायालय में दाखिल कर भी लिया जाए और मुकदमे को स्वीकार कर लिया जाए तो इसका परिणाम होगा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे आंदोलन का खात्मा और नियमानुसार कोर्ट का फ़ैसला होगा कि संसद में बना कानून के अनुसार मुख्य चुनाव आयोग के ऊपर पद में रहते हुवे और सेवा निवृत होने के बाद मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है दूसरी बात जब जज न्याय करने के स्थान पर सुझाव देने लगे और अपराधी को दंडित करने के बजाय पीड़ित को सुझाव दें कि इस बार नाम कट गया है वोटर लिस्ट से तो क्या हुआ अगले बार वोट डाल देना लेकिन इस बार अगर नाम कट गया तो अगले बार वोटर लिस्ट में नाम क्यों आएगा यह बताने वाला कोई नहीं है इसलिए लोग न्यायपालिका से न्याय के मामले मे ना उम्मीद होते चले जा रहे हैं और सरकार के मंशा के अनुसार का...

विरोध!

कभी-कभी ऐसे व्यक्ति भी मिल जाते हैं जो अपने को स्पेशल मुसलमान कहते हैं नई नई रिफॉर्म होनेे वाली मजहब के सक्रििय कार्यकर्ता है वह अल्लााह को इस तरह मानते हैं की हर चीज की तुलना अल्लााह से करते है जबकि खालिक और मखलूक की तुलना का कोई जवाज या बराबरी ही नहीं। बात पर टिप्पणी या तनकीद करते हुए कहा जाता है या मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वाले वसल्लम या अली या हुसैन आदि ना कहा करें। इस बात की तनकीद सुनने के बाद दिल में आया कि लोग यह बताते हुए नहीं थकते कि क़ुरान मजीद में हर खुशक और तर का जिक्र है ,आइए देखते हैं कि नबी अलैहिस्सलातो वससलाम और उनकी आल पाक के लिए या का इस्तेमाल किया जाना सही है या गलत है। सुरे यासीन आयत नं 60 में या बनी आदम का ज़िक्र है। यासीन में ही नबी करीम सललल्लाहो अलैह व आलेे वसल्लम को यासीन कहकर संबोधित किया गया। सुरे मुज़म्मिल (73)आयत नं. 1 या ऐइयुहल मुज़म्मिलो (ऐ चादर लिपटने वालो) सूरे मुदस्सिर (74) या ऐइयुहल मुदस्सिर से संबोधित किया गया। इससे पता चलता है कि या मोहम्मद सल्लाहो अलैह व आलेे वसल्लम, या अली, या हसन, या हुसैन कहा जाना बरहक़ है और क़ुरान मजीद के संबोधन के अनुसार है। इस पर आक्षेप करने वालो ने क़ुरान मजीद का अध्ययन अच्छे से नहीं किया है।

टिप्पणियाँ

अशफाक अहमद एड ने कहा…
बहुत ही अच्छी पोस्ट है, लाजवाब
लेकिन लेख में स्पेलिंग गड़बड़ है
अगर हो सके तो सुधार कर लें।

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