Ahmad Rizvi

शाह नेअमत उल्लाह वली की भविष्य वाणी

 शाह नेअमत उल्लाह वली जो सातवें इमाम मूसा काज़िम सलातो वस सलाम की नस्ल से है जिनका ताल्लुक ईरान से है उन्होंने आने वाले हालात के बारे में लगभग 800 साल पहले बता दिया था और आपकी सभी भविष्य वाणी अक्षरश: सही साबित हुई आपने 800 साल पहले चींटियों और टिड्डियों से हमले के बारे में बताया था चींटी और टिड्डी दोनों झुंड में हमला करती है दूसरी बात 800 सालों में ऐसी कोई ईजाद नहीं हुई जो अब हो चुकी है अब छोटे छोटे रोबोट और ड्रोन आ गए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने कितना पहले लोगो को बता दिया और जिन चीज़ों का वजूद भी नहीं उनके बारे में भी बताया दिया गौर करने की ज़रूरत है

जज साहब की पिटाई!

गुजरात में मजिस््ट्रेट को शराब शराब पिलाकर और हथकड़ी लगाकर पुलिस नेेेेे जो कार्य किया था उसकी भर्त्सना ज्यूडिशरीी ने की इसके साथ ही पूरे विश्वव नी इस घटना कीी भर्त्सना की पुलिस को जवाब देेेे बनाने के लिए तब भी कोई कानून नहीं बना था और ना आज बना है अगर सच्चाई कहीं जाए तो ना संसद में और ना विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे पर कोई प्रश्न उठाया गया और ना चर्चा की गई अब गंभीर खबर बिहार से हैं पुलिस ने न्यायपालिका पर हमला बोल दिया जज साहब मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल कोर्ट परिसर 1811 2021 को घोघरडीहा थाना अध्यक्ष ने जज साहब के चेंबर में घुसकर हमला कर दिया इस दौरान थाना अध्यक्ष ने जज साहब पर पिस्तौल तान दिया और गाली गलौज करते हुए जज साहब की पिटाई की गई भारत के न्यू इंडिया बनने के बाद इस तरह का हमला यह बता रहा है कि पुलिस तंत्र अब न्यायपालिका पर हावी हो जाएगा जजमेंट पर भी इसका अच्छा खासा असर दिखेगा न्यायपालिका को पुलिस तंत्र की प्रभाव में काम करना पड़ेगा न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम करने में अपने को अछम महसूस करेगी जब तक पुलिस के गैर कानूनी कार्रवाई यों के विरुद्ध जवाबदेही कानून नहीं बनेगा तब तक न्याय की उम्मीद करना बेकारहै। न्याय की उम्मीद करना बेकार है इसका अर्थ यह है कि पुलिस सबूतों से पहले ही उससे छेड़छाड़ या नष्ट कर चुकी होती है जज साहब की पिटाई एक गंभीर मामला इसलिए भी है कि जब न्यायपालिका के आला अधिकारी की पिटाई की जा सकती है तो आम नागरिकों के साथ पुलिस न्याय करेगी ऐसी आशा करना नितांत मूर्खता के अलावा कुछ नहीं है

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

इंजील मे इमाम हुसैन का ज़िक्र

गोग और मगोग (याजूज और माजूज)