Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

विरोध!

कभी-कभी ऐसे व्यक्ति भी मिल जाते हैं जो अपने को स्पेशल मुसलमान कहते हैं नई नई रिफॉर्म होनेे वाली मजहब के सक्रििय कार्यकर्ता है वह अल्लााह को इस तरह मानते हैं की हर चीज की तुलना अल्लााह से करते है जबकि खालिक और मखलूक की तुलना का कोई जवाज या बराबरी ही नहीं। बात पर टिप्पणी या तनकीद करते हुए कहा जाता है या मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वाले वसल्लम या अली या हुसैन आदि ना कहा करें। इस बात की तनकीद सुनने के बाद दिल में आया कि लोग यह बताते हुए नहीं थकते कि क़ुरान मजीद में हर खुशक और तर का जिक्र है ,आइए देखते हैं कि नबी अलैहिस्सलातो वससलाम और उनकी आल पाक के लिए या का इस्तेमाल किया जाना सही है या गलत है। सुरे यासीन आयत नं 60 में या बनी आदम का ज़िक्र है। यासीन में ही नबी करीम सललल्लाहो अलैह व आलेे वसल्लम को यासीन कहकर संबोधित किया गया। सुरे मुज़म्मिल (73)आयत नं. 1 या ऐइयुहल मुज़म्मिलो (ऐ चादर लिपटने वालो) सूरे मुदस्सिर (74) या ऐइयुहल मुदस्सिर से संबोधित किया गया। इससे पता चलता है कि या मोहम्मद सल्लाहो अलैह व आलेे वसल्लम, या अली, या हसन, या हुसैन कहा जाना बरहक़ है और क़ुरान मजीद के संबोधन के अनुसार है। इस पर आक्षेप करने वालो ने क़ुरान मजीद का अध्ययन अच्छे से नहीं किया है।

Comments

अशफाक अहमद एड said…
बहुत ही अच्छी पोस्ट है, लाजवाब
लेकिन लेख में स्पेलिंग गड़बड़ है
अगर हो सके तो सुधार कर लें।

Popular posts from this blog

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

खलीफा

इंजील (बाइबल ) मे मोहम्मद मुस्तफा रसूलउल्लाह का उल्लेख