Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

आतंकवाद का जनक : ब्रिटेन और अमेरिका

ब्रिटेन और अमेरिका आतंकवाद के जनक है अगर इस पर दलील न दी जाए तो बेकार है, दलील ज़रूरी है और दलील यह रही :- द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन में यहूदी नस्ल के ईसाईयों द्वारा कत्ले आम का बहाना बना कर यहूदीयों को वकती तौर पर फिलस्तीन की सरज़मीन पर ब्रिटेन के द्वारा लाया गया उस समय फिलस्तीन पर ब्रिटेन के नाजायज़ कब्ज़ा था। शरणार्थी के रुप में यहूदी फिलस्तीन में रहे और ब्रिटेन ने फिलस्तीनीयों को आश्वस्त किया कि जंग के बाद यहूदियों को फिलस्तीन से निकाल लेंगे। मक्कार और षडयन्त्रकारी ब्रिटेन पर फिलस्तीन को यकीन करना और आश्वसत होना न केवल फिलस्तीन के लिए बल्कि सम्पूर्ण मुस्लिम जगत के लिए धोखा और हानिकारक साबित हुआ। ब्रिटेन की मक्कारी और षडयंत्र को अमली जामा पहुंचाने के लिए जिस हथियार का उपयोग ब्रिटेन ने किया वह हथियार आतंकवाद /terrorism /दहशतगरदी थी अब ब्रिटेन ने यहूदियों को आधुनिकतम हथियार उपलब्ध कराए और फिलस्तीन पर यहूदियों का नाजायज़ कब्ज़ा कराया। नाजायज़ कब्ज़ा कराने के बाद उसको जायज़ भी बनाना था। जायज़ /लीगल बनाने के लिए जो माध्यम था वह अकवामे मुत्तहिदा /संयुक्त राष्ट्र संघ जिसमे ईसाई दबदबा और वर्चस्व था और है। मुसलिमो का नेतृत्व नकारा था उसे क्रिशचिएन डामिनेशन को चुनौती देने के बजाय क्रिशचिएन डामिनेशन को स्वीकार कर लिया जो अभी तक जारी है चल रही है। आतंकवाद की इस शुरूआत के बाद अमेरिका और उसके तमाम साथी देशो ने सोवियत संघ। की सेना को खदेडने के लिए अफगानिस्तान में आतंकवाद का सहारा लिया। बहुत सारी आतंकवाद और आतंकवादी का संरक्षण अमेरिका और ब्रिटेन ने किया जिसकी एक लम्बी सूचि हैं अभी हाल में अमेरिका ब्रिटेन और उसके साथी आतंकवादी देशो ने दाएश /ISIS का निर्माण किया। इन आतंकवाद समर्थक और आतंकवादी देश जब किसी संघठन या देश को आतंकवाद या आतंकवाद समर्थक कहते हैं तब विश्व को उनकी आतंकवाद के जन्मदाता और समर्थक होने की दलील के साथ उनके क्रियाकलाप को दिखा दिया करे।

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