Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

देशो का आतंकी संगठन नाटो!


नोर्थ अटलान्टिक ट्रीटी आर्गनाइजेशन जो 32  देशो से मिलकर बना है अगर इसमे तुर्की जैसे धर्मँ निरपेक्ष (मुनाफ़िक़)  को  छोड़ दे तो यह ईसाई देशो का संगठन है इस संगठन के बनने से पूर्व दुनिया पर ब्रिटेन फ़्रान्स जर्मनी हालैण्ड आदि हुक़ुमत कर रहे थे सयुन्क्त राष्ट्र संघ के बनने के बाद इस तरह के संगठन की कोई ज़रूरत ही नही थी 


लेकिन इन ईसाई देशो को दूसरे देशो के संसाधनो को लूटने की लत पड़ चुकी है इसलिए यह छोटे बड़े देशो को अपनी सयुन्क्त ताक़त की धमकी के ज़रिये उससे अपनी बात मनवा लेते है या बात न मानने पर सब मिलकर उस पर हमला कर देते हैं और उस देश के संसाधनो और दौलत को लूट लेते है इन सब के बाद कानूनी वैधता  की भी कार्यवाही करते हैं |


अब तक इन लूटेरे देशो ने अफ़्गानिसतान इराक़ लिबिया सिरिया मिश्र आदि देशो की धन सम्पदा को लूटा और साथ मे इन्सानो के खून की नदिया बहा दी, सोवियत रुस के 15 टुकडो मे बांटने मे मुख्य भुमिका निभाई 


रुस ने पोलैन्ड रोमानिया जर्मनी पर द्रोन  से हमला किया लेकिन नाटो का article 5 लागू नही हुवा जानते है क्यों?  क्योंकि रुस की फ़ौजी ताक़त का मुक़ाबला नही कर सकते हैं या होने वाले विनाश को बर्दाश्त नही कर पायेन्गे 


अनुच्छेद 5 के अनुसार सदस्य देश के किसी एक देश पर हमले को सभी देशो पर हमला मानकर सब देश मिल कर उसका जवाब देगे 


अब अफ़्गानिस्तान इराक़ लीबिया सिरिया को ले ले इन सब को एक साथ नही अलग अलग एक देश की फ़ौज का मुक़ाबला 32 देश मिलकर कर रहे थे और इस गैर बराबरी फ़ौजी ताक़त के खिलाफ़ दुनिया का कोई देश बोलने वाला नही था 


अब अमेरिका नाटो का सदस्य है और वेनेज़ुअला पर हमला कर दिया अगर अमेरिका हारने लगे तो यह सब आतंकी देश मिलकर उस पर हमला कर देंगे 


एक और उदाहरण देते है इस्राइल नाटो का सदस्य नही है अमेरिका उसके साथ है ईरान पर अमेरिका इस्राइल ने हमला किया अब अमेरिका की हार होने पर सभी आतंकी सदस्य देश ईरान पर हमला करेंगे 


यहाँ एक सवाल आया लोगो ने कहा फ़्रान्स तुर्की ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर हमला किया अब नाटो इसमे कूद सकता है मेरा जवाब था अमेरिका क्या नाटो का सदस्य नही है और अमेरिका पर हमले के साथ ही नाटो का article 5 लागू नही होता है क्या? 


अपने देशो मे दूसरे देशो के संसाधनो को लूटने के लिए सैन्य अड्डे बनाये और वहां से हमला करे लेकिन नाटो के सदस्य है इसलिए जवाब न दिया जाये कि नाटो के सभी आतंकी एक होकर हमला करेंगे 


पूरी दुनिया के देशो को इस पर विचार करना चाहिए कि आतंकी देशो के संगठनो से कैसे निपटा जाये और संसाधनों को कैसे बचाया जाये छोटा सा देश उत्तरी कोरिया के संशाधनो पर इन आतंकी देशो के संगठनो की निगाह है इनका संरक्षण बहुत ज़रूरी है इन आतंकी देशो के संगठनों से छोटे बड़े देशो के संसाधनो से बचाने के लिये समस्त देशो को आगे आना चाहिए |




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