Ahmad Rizvi

सिद्धांतवादी पार्टी कोई नही सिर्फ़ एक को छोड़कर

यह त्रणमूल कांग्रेस हो कांग्रेस हो शिवसेना हो या कोई अन्य पार्टी हो इनके कोई सिद्धांत है ही नही सिद्धांत अगर है तो वो है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उनको हिन्दू राष्ट्र बनाने और बाकि अक़्लियतो को आर्थिक समाजिक धार्मिक रूप से कंगाल बनाने का नज़रिया है और इसके लिए उसके पास करोडो लोग है उसके कार्यकर्ता प्रधानमंत्री ग्रहमन्त्री लोकसभा के स्पीकर रक्षा मंत्री से लेकर राज्यो के मुख्यमंत्री  और अधिकतर मंत्री और विधायक और सांसद है आर एस एस के कार्यकर्ता दूसरी पार्टी मे होने के बावजूद वो आर एस एस के प्रति वफ़ादार है यहां तक कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायापालिका मे भी उसके कार्यकर्ता पहुंच चुके है जो संविधान के प्रति वफ़ादार नही है बल्कि वो अपने संघठन और उसके चीफ़ के प्रति वफ़ादार है इसलिये जब कभी किसी व्यक्ति के साथ ज़ुल्म या ज़्याद्ती होती है या बेइमानी की जाती है उसमे हिन्दू राष्ट्र और आर एस एस की मुसलमानों और ईसाईयों के प्रति नफ़रत के कारण होता है अब सिद्धान्त वाली बात तो किसी पार्टी मे कोई सिद्धांत नही है आर एस एस मे सिद्धांत है वो हिन्दू राष्ट्र बनाने का और मुसलमानों पर अत्याचार करने उनकी जायद...

देशो का आतंकी संगठन नाटो!


नोर्थ अटलान्टिक ट्रीटी आर्गनाइजेशन जो 32  देशो से मिलकर बना है अगर इसमे तुर्की जैसे धर्मँ निरपेक्ष (मुनाफ़िक़)  को  छोड़ दे तो यह ईसाई देशो का संगठन है इस संगठन के बनने से पूर्व दुनिया पर ब्रिटेन फ़्रान्स जर्मनी हालैण्ड आदि हुक़ुमत कर रहे थे सयुन्क्त राष्ट्र संघ के बनने के बाद इस तरह के संगठन की कोई ज़रूरत ही नही थी 


लेकिन इन ईसाई देशो को दूसरे देशो के संसाधनो को लूटने की लत पड़ चुकी है इसलिए यह छोटे बड़े देशो को अपनी सयुन्क्त ताक़त की धमकी के ज़रिये उससे अपनी बात मनवा लेते है या बात न मानने पर सब मिलकर उस पर हमला कर देते हैं और उस देश के संसाधनो और दौलत को लूट लेते है इन सब के बाद कानूनी वैधता  की भी कार्यवाही करते हैं |


अब तक इन लूटेरे देशो ने अफ़्गानिसतान इराक़ लिबिया सिरिया मिश्र आदि देशो की धन सम्पदा को लूटा और साथ मे इन्सानो के खून की नदिया बहा दी, सोवियत रुस के 15 टुकडो मे बांटने मे मुख्य भुमिका निभाई 


रुस ने पोलैन्ड रोमानिया जर्मनी पर द्रोन  से हमला किया लेकिन नाटो का article 5 लागू नही हुवा जानते है क्यों?  क्योंकि रुस की फ़ौजी ताक़त का मुक़ाबला नही कर सकते हैं या होने वाले विनाश को बर्दाश्त नही कर पायेन्गे 


अनुच्छेद 5 के अनुसार सदस्य देश के किसी एक देश पर हमले को सभी देशो पर हमला मानकर सब देश मिल कर उसका जवाब देगे 


अब अफ़्गानिस्तान इराक़ लीबिया सिरिया को ले ले इन सब को एक साथ नही अलग अलग एक देश की फ़ौज का मुक़ाबला 32 देश मिलकर कर रहे थे और इस गैर बराबरी फ़ौजी ताक़त के खिलाफ़ दुनिया का कोई देश बोलने वाला नही था 


अब अमेरिका नाटो का सदस्य है और वेनेज़ुअला पर हमला कर दिया अगर अमेरिका हारने लगे तो यह सब आतंकी देश मिलकर उस पर हमला कर देंगे 


एक और उदाहरण देते है इस्राइल नाटो का सदस्य नही है अमेरिका उसके साथ है ईरान पर अमेरिका इस्राइल ने हमला किया अब अमेरिका की हार होने पर सभी आतंकी सदस्य देश ईरान पर हमला करेंगे 


यहाँ एक सवाल आया लोगो ने कहा फ़्रान्स तुर्की ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर हमला किया अब नाटो इसमे कूद सकता है मेरा जवाब था अमेरिका क्या नाटो का सदस्य नही है और अमेरिका पर हमले के साथ ही नाटो का article 5 लागू नही होता है क्या? 


अपने देशो मे दूसरे देशो के संसाधनो को लूटने के लिए सैन्य अड्डे बनाये और वहां से हमला करे लेकिन नाटो के सदस्य है इसलिए जवाब न दिया जाये कि नाटो के सभी आतंकी एक होकर हमला करेंगे 


पूरी दुनिया के देशो को इस पर विचार करना चाहिए कि आतंकी देशो के संगठनो से कैसे निपटा जाये और संसाधनों को कैसे बचाया जाये छोटा सा देश उत्तरी कोरिया के संशाधनो पर इन आतंकी देशो के संगठनो की निगाह है इनका संरक्षण बहुत ज़रूरी है इन आतंकी देशो के संगठनों से छोटे बड़े देशो के संसाधनो से बचाने के लिये समस्त देशो को आगे आना चाहिए |




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