Ahmad Rizvi

सिद्धांतवादी पार्टी कोई नही सिर्फ़ एक को छोड़कर

यह त्रणमूल कांग्रेस हो कांग्रेस हो शिवसेना हो या कोई अन्य पार्टी हो इनके कोई सिद्धांत है ही नही सिद्धांत अगर है तो वो है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उनको हिन्दू राष्ट्र बनाने और बाकि अक़्लियतो को आर्थिक समाजिक धार्मिक रूप से कंगाल बनाने का नज़रिया है और इसके लिए उसके पास करोडो लोग है उसके कार्यकर्ता प्रधानमंत्री ग्रहमन्त्री लोकसभा के स्पीकर रक्षा मंत्री से लेकर राज्यो के मुख्यमंत्री  और अधिकतर मंत्री और विधायक और सांसद है आर एस एस के कार्यकर्ता दूसरी पार्टी मे होने के बावजूद वो आर एस एस के प्रति वफ़ादार है यहां तक कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायापालिका मे भी उसके कार्यकर्ता पहुंच चुके है जो संविधान के प्रति वफ़ादार नही है बल्कि वो अपने संघठन और उसके चीफ़ के प्रति वफ़ादार है इसलिये जब कभी किसी व्यक्ति के साथ ज़ुल्म या ज़्याद्ती होती है या बेइमानी की जाती है उसमे हिन्दू राष्ट्र और आर एस एस की मुसलमानों और ईसाईयों के प्रति नफ़रत के कारण होता है अब सिद्धान्त वाली बात तो किसी पार्टी मे कोई सिद्धांत नही है आर एस एस मे सिद्धांत है वो हिन्दू राष्ट्र बनाने का और मुसलमानों पर अत्याचार करने उनकी जायद...

भारत सरकार की आलोचना गलत है


भारत मे गैस सिलेंडर और गैस की कमी होने के बाद लोग भारत मे नरेन्द्र दमोदर मोदी की नेत्रत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार की आलोचना करने लगे लेकिन क्या सरकार के पक्ष को भी समझा गया है मेरे ख्याल से सरकार के पक्ष और नज़रिये को सही से नही समझा गया है आइये देखते हैं सरकार के मौन पक्ष को और सरकार के बोलने वाले पक्ष को 

1. अमेरिका इस्राइल के द्वारा ईरानपर होने वाली सम्भावित जंग से पहले इस्राइल ने नरेन्द्र मोदी को अपने देश मे आने की दावत दी और वहां प्रधानमंत्री ने इस्राइल के पक्ष मे और आतंकवाद के विरोध मे भाषण दिया गया और इस्राइल का समर्थन किया गया यह आतंकवाद हमास हिज़्बुल्लाह अन्सार उल्लाह या ईरान के खिलाफ बोला गया या नही मगर इस्राइल को समर्थन करते हुवे जो नज़रिया इस्राइल का है वही नज़रिया भारत का समझा जा सकता है 

2. दूसरा ईरान पर होने वाले अमेरिका इस्राइल द्वारा छेडी गयी जंग का भारत सरकार ने कोई निन्दा नही की |

3. ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई जो दुनिया भर के शियाओ के मरजा भी है,  अमेरिका इस्राइल के बमबारी मे होने वाले क़त्ल की भी निन्दा नही की गयी और विपक्ष के आलोचना करने पर ईरान के दूतावास मे निचले दरजे के विदेश सेवा के अधिकारी को भेजा गया और शहादत या क़त्ल के स्थान पर demise लिखा गया 

4. भारत सरकार को अमेरिका और इस्राइल पर पूरा पूरा भरोसा था कि जंग अमेरिका और इस्राइल ही जीतेगे और ईरान के प्रतिशोध या जवाबी कार्यवाही को सोचा ही नही गया और strait of hormouz के बन्द होने के बारे मे ख्याल ही नही लाया गया 

5. अमेरिका द्वारा ईरान के जहाज़ जिसमे लोग हथियार विहीन थे उनको क़त्ल किया गया और जहाज़ डूबो दिया गया इस पर भी भारत सरकार ने अमेरिका की निन्दा नही की 

6.ईरान के स्कूल पर अमेरिका इस्राइल के हमले मे 165 बच्चीयोन पर टाम हाक से हमला करके स्कूल को ज़मीदोज़ और बच्चीयो का क़त्ल किया गया लेकिन भारत सरकार ने इन्सानियत सोज़ वाक़्ये के बाद भी निन्दा नही की 

इन सब के बाद जब लोग यह सुनते है कि ईरान ने होर्मुज़ से भारतीय जहाज़ो को निकलने की इजाज़त दे दी है तो इसे नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार की बहुत बडी कूटनिति जीत के तौर पर देखा जा रहा है कारण जिसका मौकिफ़ ईरान के पक्ष मे नही है फ़िर भी वो ईरान से अपनी बात को कूटनिति से जीत हासिल कर ली जबकि इस बीच मयुर नारी और अन्य जहाज़ो पर ईरान द्वारा किये गये हमले की निन्दा भारत सरकार ने की है इससे बडी कूटनिति जीत क्या हो सकती है इसलिए लोग कहते हैं नरेन्द्र मोदी के दिमाग को कोई नही पा सकता है 

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