Ahmad Rizvi

जवाबदेही/उत्तरदायी/accountability

                   जवाबदेही/उत्तरदायी/ accountability आज़ाद भारत और राजशाही मे अन्तर क्या है जब दोनों मे अधिकारीयों या नौकरशाह की मनमानी पर अंकुश ही न हो जब अदलिया सुनववाई करने से सीधा मना कर दे या यह कहे कि उसके पास इसके सुनने का समय ही नहीं है या राजा की मंशा के अनुसार काम करे और न्याय का गला घोंट दे तानाशाही राजशाही और लोकतंत्र मे अन्तर रह ही नहीं जाता जब जवाबदेही निर्धारित न हो फिर राजशाही और लोकतंत्र मे अन्तर सरकार चुनने का है और कोई अन्तर नहीं है । आज जब देखते है तो किसी आवेदन पत्र सदेश को लेने से इंकार कर दिया जाता है इसे आप छोड़ जाओ इस पर कोई प्राप्ति नहीं देंगे । डाकिया अपनी ड्यूटी से बचने के लिए अक्सर व्यक्ति मिला नहीं डाक वापस थाने मे आवेदन पत्र को पहले लेकर उसमे तोल मोल होता है तोल मोल होने के बाद प्राथीमिकी दर्ज की जाती है । आला अधिकारी से शिकायत के बाद भी दरोगा जी शिकायतकर्ता को धमकाते है और एफ आई आर दर्ज नहीं करते सरकारे क्राइम को कम करके बताती है कि उनका शासन बहुत बढ़िया है थाने मे लोगो...

भारत सरकार की आलोचना गलत है


भारत मे गैस सिलेंडर और गैस की कमी होने के बाद लोग भारत मे नरेन्द्र दमोदर मोदी की नेत्रत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार की आलोचना करने लगे लेकिन क्या सरकार के पक्ष को भी समझा गया है मेरे ख्याल से सरकार के पक्ष और नज़रिये को सही से नही समझा गया है आइये देखते हैं सरकार के मौन पक्ष को और सरकार के बोलने वाले पक्ष को 

1. अमेरिका इस्राइल के द्वारा ईरानपर होने वाली सम्भावित जंग से पहले इस्राइल ने नरेन्द्र मोदी को अपने देश मे आने की दावत दी और वहां प्रधानमंत्री ने इस्राइल के पक्ष मे और आतंकवाद के विरोध मे भाषण दिया गया और इस्राइल का समर्थन किया गया यह आतंकवाद हमास हिज़्बुल्लाह अन्सार उल्लाह या ईरान के खिलाफ बोला गया या नही मगर इस्राइल को समर्थन करते हुवे जो नज़रिया इस्राइल का है वही नज़रिया भारत का समझा जा सकता है 

2. दूसरा ईरान पर होने वाले अमेरिका इस्राइल द्वारा छेडी गयी जंग का भारत सरकार ने कोई निन्दा नही की |

3. ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई जो दुनिया भर के शियाओ के मरजा भी है,  अमेरिका इस्राइल के बमबारी मे होने वाले क़त्ल की भी निन्दा नही की गयी और विपक्ष के आलोचना करने पर ईरान के दूतावास मे निचले दरजे के विदेश सेवा के अधिकारी को भेजा गया और शहादत या क़त्ल के स्थान पर demise लिखा गया 

4. भारत सरकार को अमेरिका और इस्राइल पर पूरा पूरा भरोसा था कि जंग अमेरिका और इस्राइल ही जीतेगे और ईरान के प्रतिशोध या जवाबी कार्यवाही को सोचा ही नही गया और strait of hormouz के बन्द होने के बारे मे ख्याल ही नही लाया गया 

5. अमेरिका द्वारा ईरान के जहाज़ जिसमे लोग हथियार विहीन थे उनको क़त्ल किया गया और जहाज़ डूबो दिया गया इस पर भी भारत सरकार ने अमेरिका की निन्दा नही की 

6.ईरान के स्कूल पर अमेरिका इस्राइल के हमले मे 165 बच्चीयोन पर टाम हाक से हमला करके स्कूल को ज़मीदोज़ और बच्चीयो का क़त्ल किया गया लेकिन भारत सरकार ने इन्सानियत सोज़ वाक़्ये के बाद भी निन्दा नही की 

इन सब के बाद जब लोग यह सुनते है कि ईरान ने होर्मुज़ से भारतीय जहाज़ो को निकलने की इजाज़त दे दी है तो इसे नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार की बहुत बडी कूटनिति जीत के तौर पर देखा जा रहा है कारण जिसका मौकिफ़ ईरान के पक्ष मे नही है फ़िर भी वो ईरान से अपनी बात को कूटनिति से जीत हासिल कर ली जबकि इस बीच मयुर नारी और अन्य जहाज़ो पर ईरान द्वारा किये गये हमले की निन्दा भारत सरकार ने की है इससे बडी कूटनिति जीत क्या हो सकती है इसलिए लोग कहते हैं नरेन्द्र मोदी के दिमाग को कोई नही पा सकता है 

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