Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

भारत सरकार की आलोचना गलत है


भारत मे गैस सिलेंडर और गैस की कमी होने के बाद लोग भारत मे नरेन्द्र दमोदर मोदी की नेत्रत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार की आलोचना करने लगे लेकिन क्या सरकार के पक्ष को भी समझा गया है मेरे ख्याल से सरकार के पक्ष और नज़रिये को सही से नही समझा गया है आइये देखते हैं सरकार के मौन पक्ष को और सरकार के बोलने वाले पक्ष को 

1. अमेरिका इस्राइल के द्वारा ईरानपर होने वाली सम्भावित जंग से पहले इस्राइल ने नरेन्द्र मोदी को अपने देश मे आने की दावत दी और वहां प्रधानमंत्री ने इस्राइल के पक्ष मे और आतंकवाद के विरोध मे भाषण दिया गया और इस्राइल का समर्थन किया गया यह आतंकवाद हमास हिज़्बुल्लाह अन्सार उल्लाह या ईरान के खिलाफ बोला गया या नही मगर इस्राइल को समर्थन करते हुवे जो नज़रिया इस्राइल का है वही नज़रिया भारत का समझा जा सकता है 

2. दूसरा ईरान पर होने वाले अमेरिका इस्राइल द्वारा छेडी गयी जंग का भारत सरकार ने कोई निन्दा नही की |

3. ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई जो दुनिया भर के शियाओ के मरजा भी है,  अमेरिका इस्राइल के बमबारी मे होने वाले क़त्ल की भी निन्दा नही की गयी और विपक्ष के आलोचना करने पर ईरान के दूतावास मे निचले दरजे के विदेश सेवा के अधिकारी को भेजा गया और शहादत या क़त्ल के स्थान पर demise लिखा गया 

4. भारत सरकार को अमेरिका और इस्राइल पर पूरा पूरा भरोसा था कि जंग अमेरिका और इस्राइल ही जीतेगे और ईरान के प्रतिशोध या जवाबी कार्यवाही को सोचा ही नही गया और strait of hormouz के बन्द होने के बारे मे ख्याल ही नही लाया गया 

5. अमेरिका द्वारा ईरान के जहाज़ जिसमे लोग हथियार विहीन थे उनको क़त्ल किया गया और जहाज़ डूबो दिया गया इस पर भी भारत सरकार ने अमेरिका की निन्दा नही की 

6.ईरान के स्कूल पर अमेरिका इस्राइल के हमले मे 165 बच्चीयोन पर टाम हाक से हमला करके स्कूल को ज़मीदोज़ और बच्चीयो का क़त्ल किया गया लेकिन भारत सरकार ने इन्सानियत सोज़ वाक़्ये के बाद भी निन्दा नही की 

इन सब के बाद जब लोग यह सुनते है कि ईरान ने होर्मुज़ से भारतीय जहाज़ो को निकलने की इजाज़त दे दी है तो इसे नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार की बहुत बडी कूटनिति जीत के तौर पर देखा जा रहा है कारण जिसका मौकिफ़ ईरान के पक्ष मे नही है फ़िर भी वो ईरान से अपनी बात को कूटनिति से जीत हासिल कर ली जबकि इस बीच मयुर नारी और अन्य जहाज़ो पर ईरान द्वारा किये गये हमले की निन्दा भारत सरकार ने की है इससे बडी कूटनिति जीत क्या हो सकती है इसलिए लोग कहते हैं नरेन्द्र मोदी के दिमाग को कोई नही पा सकता है 

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