Ahmad Rizvi

मौलूद –ए- काबा

चित्र
                    अल्लाह रब्बूल इज्जत ने साबिक अम्बिया और रसूल पर जो वाकयात या घटनाए हुई है उसके आने वाले समय मे उसका पैगाम देना है इबरत करना है नसीहत करना हिदायत देना है फ़ज़ीलत बताना है । जब हज़रत ईसा की पैदाइश का समय आया आपकी वालिदा जनाब बीबी मरीयम बैतुल मुक़द्दस के अन्दर रहती थी उस वक़्त अल्लाह सुभान व तआला ने बीबी मरियम को हुक्म दिया कि बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दो यह इबादत का घर है जच्चा खाना नहीं है । आप बीबी मरियम ने बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दिया । यहाँ पर सवाल उठता है कि 123998 अंबिया से अफजल हज़रत ईसा और उनकी माता बीबी मरियम दोनों पाक है दोनों फ़ज़ीलत रखते है हज़रत ईसा रसूल भी है । अल्लाह जुलजलाल वल इकराम का हर कारनामा हिकमत से भरा होता है । मौला अली की पैदाइश खाना – ए - काबा के अन्दर हुई थी आपकी वालिदा मुक़द्दस जनाबे फातिमा बिन्ते असद जब खाना - ए - काबा मे दाखिल हुई तो द...

गुलामी की मानसिकता

 दैनिक जागरण के EDITORAIL संस्करण दिनांक 28-06-2026 अमेरिका ईरान मे भिड़ंत  के उनवान से 

वास्तव मे ईरान इस कोशिश मे है कि होर्मुज पर उसका आधिपत्य स्वीकार किया जाए । यह उसकी मनमानी के अलावा कुछ नहीं । 

होरमुज सरीखे दुनिया के सभी समुद्री व्यापारिक मार्ग स्वतंत्र नौवहन के लिए खुले है । एक अंतर्राष्ट्रीय संधि के अनुसार किसी देश को अपने तटवर्ती समुद्री मार्ग से किसी तरह की वसूली करने या टैक्स लेने का अधिकार नहीं है । 

तनकीद   : इस सम्बन्ध  मे दो नज़ीर पेश करता हूँ एक है सवेज कैनाल जहां से मिश्र टैक्स वसूलता है और दूसरा है पनामा नहर जहां से पनामा वसूलता है इस तरह यह कहना कि एक अंतर्राष्ट्रीय संधि के अनुसार किसी देश को अपने तटवर्ती समुद्री मार्ग से किसी तरह की वसूली करने या टैक्स लेने का अधिकार नहीं है  पूर्णतय: गलत है । 

ईरान होरमुज के मामले मे यह अधिकार जबरन हासिल करना चाहता है ।  उसे यह अधिकार नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि होरमुज पर उसका दावा उसकी दादागिरी के अलावा और कुछ नहीं । यह एक ऐसा मामला है , जिसमे ईरान के रुख का समर्थन नहीं किया जा सकता है । 

तनकीद : ईरान दुनिया से क्या समर्थन मांग रहा है या अमेरिका की तरह दुनिया से भीख मांग रहा है कि उसकी मदद करो तुम्हारे समर्थन की ईरान को ज़रूरत क्या है ? जब अमेरिकी और इसराईली आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के बजाय उसका समर्थन करते रहे। ईरान के मिनाब मे स्कूली बच्चों पर होने वाले हमले पर खामोश रहे जब ईरान पर हुवे अमेरिकी और इसराएली आतंकवाद की भर्त्सना नहीं की गई और बहरीन पर ईरानी हमलों की मज़म्मत की गई उससे ईरान समर्थन की उम्मीद भी नहीं करता है । अमेरिकी दादागिरी और आतंकवाद पर खामोश रहने वाले जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अगवा कर लिया और उसके देश मे डाका डाल दिया तब इस आतंकवाद पर खामोश रहना गुलामी की मानसिकता को दिखाता है । 


यह  ठीक है अमेरिका और इस्राइल ने ईरान को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया और पश्चिम एशिया की शांति को खतरे मे डालने के साथ ही विश्व अर्थव्ययस्था के लिए संकट पैदा किया ,लेकिन होरमुज को अपने नियंत्रण मे लेने की ईरान की कोशिश उसे खलनायक ही सिद्ध करने वाली है । संभवत : होरमुज पर ईरान के अनैतिक तरीके से आधिपत्य जमाने की कोशिश का जवाब देने के लिए ही अमेरिकी सेना ने उसके ठिकाने पर बमबारी की , लेकिन ईरान ने भी  खाड़ी देशों मे अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर निशाना बनाने मे देर नहीं की । अमेरिकी और ईरान के बीच इस ताज़ा सैन्य झड़प से इसे लेकर संदेह पैदा हो गया है कि दोनों के बीच जिस शांति समझौते पर सहमति बनी ,यह कितना टिकाऊ साबित होगा ?

तनकीद : गुलामी की मानसिकता को यहाँ देखा गया है "यह  ठीक है अमेरिका और इस्राइल ने ईरान को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया और पश्चिम एशिया की शांति को खतरे मे डालने के साथ ही विश्व अर्थव्ययस्था के लिए संकट पैदा किया ,लेकिन होरमुज को अपने नियंत्रण मे लेने की ईरान की कोशिश उसे खलनायक ही सिद्ध करने वाली है ।यह ठीक है बता रहा गुलामों की मानसिकता को हम आज़ाद जरूर हो गए है मगर जिनके बाप दादा अंग्रेजों के गुलाम थे उनकी औलादे आज भी गुलाम मानसिकता रखती है उनकी गुलामी के ज़ेहन मे कोई फ़र्क  नहीं आया है । इस गुलाम मानसिकता के लोगों को यह नहीं पता कि होरमुज जंग से पहले खुला हुवा था। संभवत : होरमुज पर ईरान के अनैतिक तरीके से आधिपत्य जमाने की कोशिश का जवाब देने के लिए ही अमेरिकी सेना ने उसके ठिकाने पर बमबारी की , लेकिन ईरान ने भी  खाड़ी देशों मे अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर निशाना बनाने मे देर नहीं की सवाल पैदा होता है अमेरिका पर हमले के लिए ईरान अमेरिका गया या अमेरिका ने ईरान पर हमला किया अमेरिका ने ईरान पर हमला किया ईरान खाड़ी देशों मे अमेरिकी  सैन्य ठिकानों पर लड्डू बांटता कि बहुत अच्छा किया हमारे इन्फ्रस्ट्रक्चर को बर्बाद किया ।  रही बात अंतर्राष्ट्रीय संधि की तो अमेरिका और इसराएल का ईरान पर हमला करना अंतर्राष्ट्रीय संधि के अनुसार था बिल्कुल नहीं । निष्पक्ष पत्रकारिता करना और है गुलामी की मानसिकता को दर्शाना और है यहाँ गुलामी की मानसिकता दिख रही है । 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मौला अली साबिक अम्बिया से अफज़ल है

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

खतना