हिज़बुल्लाह इस्राइल और आतंक
इस्राइल : जर्मनी और दुनियाभर से लाये गये यहूदीयों को फ़िलिस्तीन मे लाया गया अमेरिका ब्रिटेन फ़्रान्स रुस आदि देशो ने यहूदीयों को हथियार दिया जिससे फ़िलिस्तीनीयों का क़त्ले आम किया गया और आतंक के बल पर इस्राइल देश को बनाया गया जिसका संरक्षण वीटो ताक़त वाले देश अमेरिका ब्रिटेन फ़्रान्स और रुस करते रहे हैं यहां विशेष बात यह है कि इस्राइल आतंकवादी से एक देश बन गया और अब इस्राइल का आतंक एक देश के कानूनी जामा पहने हुवे हो गया | अब जब अन्य देश आतंकवाद के खिलाफ़ बोलते हैं तो वो फ़िलिस्तीन द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ़ बोलते है लेकिन इस्राइल के बड़े से बड़े आतंक पर चुप्पी बनाये रहते हैं कारण राज्य के द्वारा किया गया कार्य कानूनी सम्मत समझा जा रहा है |
सिरिया : सिरिया के मोहम्मद अल जोलानी का उदाहरण लेते है जो अमेरिका के निगाह मे घोषित ईनामी आतंकवादी थे कब तक थे? जब तक उनके हाथ मे सत्ता नही आ गई और अमेरिका और इस्राइल के हितो मे काम नही करने लगे जैसे ही अमेरिका और इस्राइल के लिये काम करने लगे वो मोहम्मद अल जोलानी आतंकवादी से प्रेसीडेन्ट अहमद अल शरा बन गये | यहाँ यह लिखने का मुख्य उद्देश्य यह है कि हुक़ुमत का बन जाना दुनिया के नज़रिये को बदल देता है या दूसरे देशो के व्यवहार मे तब्दीली आ चुकी होती है |
अफ़्गानिस्तान : अफ़ग़ानिस्तान मे अमेरिका के आतंकवादी हमले और सोवियत संघ के खिलाफ़ अफ़गानो का इस्तेमाल के बाद जिस तरह आतंकवाद को उखाड़ फ़ेकने के लिये हमला किया और 15 अगस्त 2021 को उसी तालिबान को सत्ता सौंप दी नज़रिये मे तब्दीली देखिये भारत सरकार ने तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित किया था लेकिन जैसे ही तालिबान की सरकार बन गयी वैसे ही उसको मान्यता दी जाने लगी |
हिज़बुल्लाह : इस्राइल के मज़ालिम का विरोध करने और लेबनान की ज़मीन को इस्राइली आतंकीयों से आज़ाद कराने के लिये जिस हिज़बुल्लाह का गठन किया गया उसको आतंकी संगठन क्यों कहा जा रहा है? कभी किसी बेगुनाह का क़त्ल नही किया इस्राइल की तरह, उसका सबसे बड़ा कारण है गुलामी के दौर का अनुसरण करना फ़्रान्स की अधीनता को स्वीकार करना जिसमे लेबनान मे ईसाई ही राष्ट्रपति बनेगा वो भी वो ईसाई जिसको फ़्रान्स मान्यता देता हो शिया स्पीकर बनेगा और सुन्नी प्रधानमंत्री बनेगा जिस तरह भारत सरकार संविधान की article 370 को खत्म कर सकती है उसी तरह लेबनान के संविधान को खत्म करके आज़ाद संविधान की ज़रूरत है जिसमे किसी को चुने जाने की बाध्यता न हो हिज़बुल्लाह के फ़ौजीयो को रेगुलर आर्मी बनाया जाये जोलानी की तरह हिज़बुल्लाह चीफ़ को लेबनान का प्रेसिडेन्ट होना चाहिए | ताकि हिज़बुल्लाह एक स्टेट के रूप मे लेबनान की रक्षा कर सके | लेखक को ऐसा महसूस होता है कि ईरान इस मामले मे चूक गया है भले ही चूक हो गयी हो लेकिन इस चूक को खत्म किया जा सकता है |
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