सिद्धांतवादी पार्टी कोई नही सिर्फ़ एक को छोड़कर
यह त्रणमूल कांग्रेस हो कांग्रेस हो शिवसेना हो या कोई अन्य पार्टी हो इनके कोई सिद्धांत है ही नही सिद्धांत अगर है तो वो है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उनको हिन्दू राष्ट्र बनाने और बाकि अक़्लियतो को आर्थिक समाजिक धार्मिक रूप से कंगाल बनाने का नज़रिया है और इसके लिए उसके पास करोडो लोग है उसके कार्यकर्ता प्रधानमंत्री ग्रहमन्त्री लोकसभा के स्पीकर रक्षा मंत्री से लेकर राज्यो के मुख्यमंत्री और अधिकतर मंत्री और विधायक और सांसद है आर एस एस के कार्यकर्ता दूसरी पार्टी मे होने के बावजूद वो आर एस एस के प्रति वफ़ादार है यहां तक कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायापालिका मे भी उसके कार्यकर्ता पहुंच चुके है जो संविधान के प्रति वफ़ादार नही है बल्कि वो अपने संघठन और उसके चीफ़ के प्रति वफ़ादार है इसलिये जब कभी किसी व्यक्ति के साथ ज़ुल्म या ज़्याद्ती होती है या बेइमानी की जाती है उसमे हिन्दू राष्ट्र और आर एस एस की मुसलमानों और ईसाईयों के प्रति नफ़रत के कारण होता है अब सिद्धान्त वाली बात तो किसी पार्टी मे कोई सिद्धांत नही है आर एस एस मे सिद्धांत है वो हिन्दू राष्ट्र बनाने का और मुसलमानों पर अत्याचार करने उनकी जायदाद को क़ब्ज़े मे लेने का उनके घरो पर बिना किसी कानून प्रक्रिया को किये बुलडोज़र चला देना उनका क़त्ल करना और सभी जगह बैठे आर एस एस के कार्यकर्ता का मदद करना इसलिये देशभर मे पार्टीयों मे जो फ़ूट पडती है उसमे सब के सब भारतीय जनता पार्टी के साथ क्यों हो जाते हैं? तो उसका जवाब है कि जिस असल पार्टी अर्थात आर एस एस से आये थे उसके प्रति वफ़ादार थे उसके इशारे पर सही मुकाम पर पहुंच गये मौला ए कायनात अली इब्ने अबी तालिब का एक कौल है "हर शय अपनी असल की तरफ़ पलट जाती है "
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