मौलूद –ए- काबा
अल्लाह रब्बूल इज्जत ने साबिक अम्बिया और रसूल पर जो वाकयात या घटनाए हुई है उसके आने वाले समयमे उसका पैगाम देना है इबरत करना है नसीहत करना हिदायत देना है फ़ज़ीलत बताना है ।
जब हज़रत ईसा की पैदाइश का समय आया आपकी वालिदा जनाब बीबी मरीयम बैतुल मुक़द्दस के अन्दर रहती थी उस वक़्त अल्लाह सुभान व तआला ने बीबी मरियम को हुक्म दिया कि बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दो यह इबादत का घर है जच्चा खाना नहीं है । आप बीबी मरियम ने बैतुल मुक़द्दस को खाली कर दिया ।
यहाँ पर सवाल उठता है कि
123998 अंबिया से अफजल हज़रत ईसा और उनकी माता बीबी मरियम दोनों पाक है दोनों फ़ज़ीलत रखते है हज़रत ईसा रसूल भी है ।
अल्लाह जुलजलाल वल इकराम का हर कारनामा हिकमत से भरा होता है ।
मौला अली की पैदाइश खाना –ए-काबा के अन्दर हुई थी आपकी वालिदा मुक़द्दस जनाबे फातिमा बिन्ते असद जब खाना-ए-काबा मे दाखिल हुई तो दरवाज़े से दाखिल नहीं हुई बल्कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने खाना –ए-काबा की दीवार से जो रास्ता बनाया था उसका निशान आज तक बाकी है इस निशान को मिटाया नहीं जा सकता , खाना-ए-काबा के उस निशान को खत्म नहीं किया जा सकता है । सन
2020 मे जब खाना-ए-काबा के गिलाफ (पर्दा) तेज़ हवा के झोंकों से उठ गया और उसकी तस्वीर दुनिया भर मे वायरल हुई तो लोगों ने उस निशान को देखा ।
बीबी मरियम को बैतुल मुक़द्दस से निकल जाने का हुक्म देना और मौला अली की विलादत पर काबे की दीवार का शक (फट जाना) होना और उसमे आपकी वालिदा माजिदा फातिमा बिन्ते असद का दाखिल होना आपकी वालिदा और और आपकी अज़मत और आपकी फ़ज़ीलत को अल्लाह ज़ुलजलाल वल इकराम जगजाहिर कर रहा है और इसी विलादत की जगह पर हज का होना भी अज़मत को बयान कर रहा है ।
यहाँ साबिक अम्बिया और रसूल हज़रत ईसा की पैदाइश मे बैतुल मुक़द्दस से बाहर करना और मौला अली की विलादत को काबे मे करना कितनी विशाल अज़मत को बताया ।
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