वक़्त ए यज़ीद की बैअत
इमाम हुसैन सलातो व सलाम ने यज़ीद की बैअत से इंकार कर दिया | सर दाद न दाद दस्त हक़्क़ा कि ला इलाह इललल्लाह हुसैन अस्त " सर दे दिया हाथ नही दिया ला इलाहा इल्ला की बुनियाद हुसैन है "
लम्बे वक़्त तक यज़ीद और यज़ीद की औलादे बैअत का मतालबा नही किया लेकिन यज़ीद की औलादे और उनके मानने वाले कव तक ख़ामोश रहते आखिरकार दुनिया के अम्न की दुहाई देते हुवे दुनिया मे एक संगठन कायम करने की ज़रुरत को बताया और लीग आफ़ नेशन को बनाया गया यह यज़ीदीयो की पहली बडी कामयाबी थी
इस सफ़लता के बाद यूनाइटिड नेशन की बुनियाद सन 1945 मे जंग ए अज़ीम दो के बाद की गयी |
अब तक जो अल्लाहो अकबर कहते थे अल्लाह को अकबर् मानते हैं और एकाधिकार का विरोध करते थे उन्होने विटो को स्वीकार कर लिया और अक़्वामे मुतत्हिदा के रुक्न बनकर फ़ख्र करने लगे ईसाईयत के गलबे को तस्लीम कर लिया गया |
इस यज़ीदी बैअत का नतीजा यह निकला कि जनरल असेम्बली मे करारदाद पास होने के बाद भी अमेरिका ने विटो करके रोक दिया |
वेनेज़ुअला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी का अमेरिका अपहरण कर लेता है दुनिया खामोश रहती है इराक़ मे हमला करके उसके वसाएल को अमेरिका लूट लेता है अक़्वामे मुतताहिदा खमोश दर्जनो नज़ीरे है विएतनाम पनामा अफ़्गानिस्तान इराक़ लिबिया सिरिया यमन
इस्राइल और अमेरिका के अन्य लूटेरे दुनिया के अन्य देशो के वसाएल को लूटते रहे और बाकि देश खमोश इसलिये रहे कि वो बैनुल अक़्वामी इदारे के मेम्बर है
वक़्त ए यज़ीद ने दुनिया के सब देशो से अपनी बैअत कराकर अपनी गैर कानूनी गैर वाजिब इस्लाम के क्वानीन के बरक़्श जो काम हो सकते थे उसको कानूनी रूप दिया और ईसाईयत को हावी कर दिया
सवाल यह है कि मुस्लिम हुक़्मरान कैसे आ गये अमेरिका ब्रिटेन फ़्रान्स जर्मनी रुस की चाल मे तो जवाब उसका यह है कि जब वो मुसलमान हो भी यह नाम के मुसलमान तो है मगर क़ुरान मजीद की मुखालफ़त यह करे अल्लाह की मुखालफ़त यह करे रसूलुल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफ़त यह करे
अब एक मुसलमान को तक़्लीफ़ पहुंचे तो दूसरा मुसलमान उस तक्लीफ़ को महसूस करे यहाँ फ़िलिस्तीन की पूरी मुस्लिम नस्ल उजाड़ दी जा रही है और मुस्लिम हुक़्मरान खामोश तमाशाई बने है तुर्की का राष्ट्रपति अपनी गिर चुके वक़ार को बचाने के लिये और पूरी दुनिया के मुस्लिमो को बेवकूफ़ बनाने के लिये बयानबाज़ी मे कोई कमी नही करता है
इमाम हुसैन सलातो व सलाम ने यज़ीद की बैअत न कर के जो पैगाम रहती दुनिया को दिया है उसको आज की दुनिया और मुस्लिम अच्छे से समझ सकते हैं कि "हर गैर कानूनी और शरियत की मुखालिफ़ चीज़ो को कानूनी जामा पहनने से हमेशा हमेश के लिए रोक दिया "
आक़ा मौला इमाम हुसैन पर दुरूदो सलाम :
सलल्लाहो अलैका या अबा अब्दुल्लाह
अस सलाम अलल हुसैन व अला अली इब्नल हुसैन व अला औलादिल हुसैन व अला असहाबिल हुसैन
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