Ahmad Rizvi

सिद्धांतवादी पार्टी कोई नही सिर्फ़ एक को छोड़कर

यह त्रणमूल कांग्रेस हो कांग्रेस हो शिवसेना हो या कोई अन्य पार्टी हो इनके कोई सिद्धांत है ही नही सिद्धांत अगर है तो वो है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उनको हिन्दू राष्ट्र बनाने और बाकि अक़्लियतो को आर्थिक समाजिक धार्मिक रूप से कंगाल बनाने का नज़रिया है और इसके लिए उसके पास करोडो लोग है उसके कार्यकर्ता प्रधानमंत्री ग्रहमन्त्री लोकसभा के स्पीकर रक्षा मंत्री से लेकर राज्यो के मुख्यमंत्री  और अधिकतर मंत्री और विधायक और सांसद है आर एस एस के कार्यकर्ता दूसरी पार्टी मे होने के बावजूद वो आर एस एस के प्रति वफ़ादार है यहां तक कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायापालिका मे भी उसके कार्यकर्ता पहुंच चुके है जो संविधान के प्रति वफ़ादार नही है बल्कि वो अपने संघठन और उसके चीफ़ के प्रति वफ़ादार है इसलिये जब कभी किसी व्यक्ति के साथ ज़ुल्म या ज़्याद्ती होती है या बेइमानी की जाती है उसमे हिन्दू राष्ट्र और आर एस एस की मुसलमानों और ईसाईयों के प्रति नफ़रत के कारण होता है अब सिद्धान्त वाली बात तो किसी पार्टी मे कोई सिद्धांत नही है आर एस एस मे सिद्धांत है वो हिन्दू राष्ट्र बनाने का और मुसलमानों पर अत्याचार करने उनकी जायद...

बुरी ताकत !


अरमेगदान वार और हज़रत ईसा के दोबारा आने के बारे मे पादरी और डोनाल्ड ट्रम्प बात कर रहे है बिल्कुल सही बात कर रहे हज़रत ईसा के दोबारा आने का इंतिज़ार ईसाई ही नहीं मुसलमान भी कर रहे है और ईरानी भी कर रहे है रही बात अरमेगदान जंग की जिसमे शैतानी ताकतों और नेक लोगों के बीच जंग होगी ट्रम्प शैतानी ताकतों का प्रतिनिधि कर रहे है और उनका नाम एपेसटीन फ़ाइल मे होना और गुनाहगारी मे शामिल होने वाला शैतानी ताकतों का लीडर हो सकता है ईरान के सुप्रीम लीडर जो निहायत नेक है वो नेक लोगों का प्रतिनिधि कर रहे थे केवल हज़रत ईसा की दोबारा आने की जानकारी का होना नेक होने की दलील नहीं है हज़रत ईसा का दोबारा आने की निशानी यह भी है कि इस्राइल का तबाह होना है इससे पता चलता है कि इस्राइल को अच्छी ताकत नहीं है बुरी ताकत है और बुरी ताकत का अरमेगदान मे हार होनी है इसी तरह अमेरिका जैसे सुपर पावर का अपने से बहुत छोटी ताकत ईरान से शिकष्त खाना भी यह बता रहा है कि बुरी ताकत कितनी भी ताकतवर क्यों न हो वो फिरौन की तरह हार होना निश्चित है ।


 

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