Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

क्या भारत मे मुसलमानों को रहने का अधिकार है या नहीं जबकि पाकिस्तान का निर्माण हो चुका

सन 1947 मे अंग्रेजों के द्वारा indian partition act 1947 को ब्रिटिश संसद मे पारित किया गया, बटवारा दो देशों इंडिया और पाकिस्तान मे किया गया। यह बटवारा ब्रिटिश इंडिया जो कब्जा ब्रिटेन का था, बटवारा भी उन इलाकों का किया गया जहाँ पर मुस्लिम बहुल के साथ अलग होने के लिए वोटिंग कराई गई थी।देशी रियासते:- भारत मे आजादी से पहले व आजादी के बाद देशी रियासते थी, देशी रियासते वह रियायतें थी जिन्हें राजाओ, बादशाहो ,नवाबो, निजामो द्वारा शासित किया जाता था, देशी रियासत जिन पर अंग्रेजो की अधीनता नही थी उस पर सवाल उठने लगे कि उनका क्या होगा, इस पर अंग्रेजो़ ने देशी रियासत के लिये 3 प्रकार के प्राविधान किये :1. देशी रियासत आजाद बनी रहना चाहे आजाद बनी रह सकती है। 2. भारत मे मिलना चाहे तो भारत मे मिल सकती है। 3. पाकिस्तान मे मिलना चाहे तो पाकिस्तान में मिल सकती है। पाकिस्तान का बटवारा ब्रिटिश इंडिया व देशी रियासत के सम्पूर्ण मुसलमानों के लिए नहीं हुआ था, यह बटवारा क्षेत्रीय मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए था, आजाद भारत मे देशी रियासत जिसमे हिन्दू ,मुस्लिम व अन्य थे भारत मे मिलने के समय यह निर्धारित नहीं किया गया था कि उनकी हिन्दू प्रजा या मुस्लिम प्रजा को बिना स्वीकार किए मिलाएंगे, इस प्रकार ब्रिटिश इंडिया के मुस्लिम, देशी रियासत के मुस्लिम इंडिया के नागरिक हुए, देशी रियासत के merge के साथ ही इंडिया Union Of India हो गया, मुस्लिम पर सवाल उठाने वाले या तो अञानी/जाहिल है या जानबूझकर मुस्लिमो को दिमाग़ी परेशान करने के लिए करते है ताकि रोजगार के मसले व अन्य मसलो को उठाने से रोका जा सके।

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Yakinan muslimo ke sath bhed bhao hua hai azadi ke bad se aur aaj tak unke sath bhed bhao ho raha hai jiski mukh wjha nam nehad ke musalman.hai jo sarkar me rahker qaum ke badtaren halat ke zimmedar hai. Musalmano ne haqiqi deen ko samkjha nahi aur time to time digar partiyo ko support karke apna waqar gira liya aur maujuda hukumat to Musalmano hi nahi balki khullam khulla Islam wirodhi kanoon pass kar chuki aur Musalmano ke tama maulana aur leader khamosh hai
Gaurav Singh ने कहा…
Pakiatani schools ke textbooks jo nafrat se bhare hue hai, wo kaun se jahalat ka praman hai? - https://decodingdreamindia.com/melodious-history-in-pakistan-schools-textbook/

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