Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

तुर्किये

तुर्कीये तुर्की दुनिया भर के मुसलमानों के जज़्बात के अनुसार बयान देता है तुर्की नाटो का सदस्य है इराक और सीरिया में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ मिलकर आइसिस को प्रशिक्षण देने उन्हें रहने खाने और हथियार की सहूलत देने के साथ तुर्की की ज़मीन को इराक और सीरिया में आतंकवादी गतिविधियों के इस्तेमाल की इजाज़त भी दी। इसके साथ 7 अक्टूबर 2023 से फिलिस्तीन पर होने वाले हमले की मजम्मत करने में तुर्की सबसे आगे था और है लेकिन तुर्की की कोई दिलचस्पी इसराइल को रोकने में कभी नहीं रही उसकी दिलचस्पी सीरिया में तख्तापलट की रही सीरिया की सरकार बदल गयी मगर इस सरकार के बदलने में सबसे अहम रोल अदा किया तुर्की ने और सबसे ज़्यादा फायदा हुआ है अमेरिका और इसराइल को फिर भी लोग यह समझते हैं कि तुर्की फिलिस्तीन या अरब का हमदर्द है गलत है ये अमेरिका और इसराइल का एजेंट है और इस एजेंट को ही अमेरिका और अन्य, मुसलमानों का खलीफा कभी हमदर्द और न जाने क्या क्या प्रोजेक्ट करते है

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