Ahmad Rizvi

पत्रकारिता (सहाफ़त) की आड मे जासूसी

 अफ़्गनिस्तान मे रशीद दोस्तम को क़ातिल एक पत्रकार बनकर आया और क़त्ल कर दिया | ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई को स्पीच देने के दौरान किसी नामालूम सहाफ़ी ने बम नस्फ़ कर दिया था जिसमे आपका एक हाथ माज़ूल हो गया था |  ईरान मे यहूदी महिला जासूस ने सहाफ़ी बनकर किस तरह अपने ताल्लुक़ात को कायम किया कि तमाम फ़ौजी जनरलो के साथ साथ सुप्रीम लीडर से भी मुलाक़ात की और तमाम फ़ौजी जनरलो की सूचना और पते मोसाद और इस्राइल को पहुंचाती रही | लगातार इस्राइल सहाफ़ीयों का क़त्ल कर रहा है उसका मुख्य कारण यह है कि इस्राइल खुद अपने जासूसो को सहाफ़ी बनाकर भेजता है और दुनिया भर के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल वो जासूसी के लिए करता है और जहां इस्राएल नही पहुंच पाता है वहां  अपने दोस्त देशो के सहाफ़ीयों का इस्तेमाल करता है  हाल ही मे अपने देश भारत मे भी सहाफ़ी और यूटयुबर ज्योति मेहरोत्रा को जासूसी के आरोप मे गिरफ़्तार किया गया | इस्राइल के जासूसो को अगर पकड़ना है तो इस्राइल समर्थक सहाफ़ीयों पर कडी नज़र रखनी होगी! 

तुर्किये

तुर्कीये तुर्की दुनिया भर के मुसलमानों के जज़्बात के अनुसार बयान देता है तुर्की नाटो का सदस्य है इराक और सीरिया में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ मिलकर आइसिस को प्रशिक्षण देने उन्हें रहने खाने और हथियार की सहूलत देने के साथ तुर्की की ज़मीन को इराक और सीरिया में आतंकवादी गतिविधियों के इस्तेमाल की इजाज़त भी दी। इसके साथ 7 अक्टूबर 2023 से फिलिस्तीन पर होने वाले हमले की मजम्मत करने में तुर्की सबसे आगे था और है लेकिन तुर्की की कोई दिलचस्पी इसराइल को रोकने में कभी नहीं रही उसकी दिलचस्पी सीरिया में तख्तापलट की रही सीरिया की सरकार बदल गयी मगर इस सरकार के बदलने में सबसे अहम रोल अदा किया तुर्की ने और सबसे ज़्यादा फायदा हुआ है अमेरिका और इसराइल को फिर भी लोग यह समझते हैं कि तुर्की फिलिस्तीन या अरब का हमदर्द है गलत है ये अमेरिका और इसराइल का एजेंट है और इस एजेंट को ही अमेरिका और अन्य, मुसलमानों का खलीफा कभी हमदर्द और न जाने क्या क्या प्रोजेक्ट करते है

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