Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

तुर्किये

तुर्कीये तुर्की दुनिया भर के मुसलमानों के जज़्बात के अनुसार बयान देता है तुर्की नाटो का सदस्य है इराक और सीरिया में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ मिलकर आइसिस को प्रशिक्षण देने उन्हें रहने खाने और हथियार की सहूलत देने के साथ तुर्की की ज़मीन को इराक और सीरिया में आतंकवादी गतिविधियों के इस्तेमाल की इजाज़त भी दी। इसके साथ 7 अक्टूबर 2023 से फिलिस्तीन पर होने वाले हमले की मजम्मत करने में तुर्की सबसे आगे था और है लेकिन तुर्की की कोई दिलचस्पी इसराइल को रोकने में कभी नहीं रही उसकी दिलचस्पी सीरिया में तख्तापलट की रही सीरिया की सरकार बदल गयी मगर इस सरकार के बदलने में सबसे अहम रोल अदा किया तुर्की ने और सबसे ज़्यादा फायदा हुआ है अमेरिका और इसराइल को फिर भी लोग यह समझते हैं कि तुर्की फिलिस्तीन या अरब का हमदर्द है गलत है ये अमेरिका और इसराइल का एजेंट है और इस एजेंट को ही अमेरिका और अन्य, मुसलमानों का खलीफा कभी हमदर्द और न जाने क्या क्या प्रोजेक्ट करते है

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