Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

पश्चिमी देशो के मानवाधिकार के ढोंग!

 मानवाधिकार का मामला हो या अन्य कोई मामला उसको पश्चिमी देश तभी उठाते है जब उस मानावाधिकार के मुद्दे से राजनिति के लाभ लेने हो या उस देश को अपने हितो के लिये मजबूर करना हो जैसे अल्पसंख्यको के उपर अत्याचार हो रहा ईसाई मारे जा रहे है या ईसाईयों की घर वापसी हो रही है हंगामा काट देते पश्चिमी देश छोटी छोटी घटनाओ पर पूरे विश्व की मीडिया हंगामा मचा देती बहिष्कार हो रहा होता उस देश का सैन्कशन लग रहे होते और व्यापार का बहिष्कार किया जा रहा होता इस तरह पूरी दुनिया से काट दिया गया होता एक अल्पसंख्यक की मौत पर ऐसा हंगामा किया जा रहा होता है |


और अगर अमेरिका और पश्चिमी देशो के वर्चस्व को बढावा देने के लिए उनकी ताक़त मे इजाफ़ा के लिए हो उनकी सीमाओ का विस्तार के लिए हो उनकी दूसरे देशो की लूट के लिए सहयोगी हो तो फ़िर खामोशी रहती है पश्चिमी देशो के हुक़ुमरानो मे मीडिया मे और अन्य संस्थानों मे|


फ़िर लाखो लोगो को नज़रबन्द कर लिया गया हो तो भी खामोशी होगी लोगो का क़त्ले आम (फ़िलिस्तीन इराक़ सिरिया आदि)  हो तब भी खामोशी रहती है 


कहने का तात्पर्य यह है कि इन पश्चिमी देशो ने मानव मूल्यो से सम्बन्धित मामले को भी हथियार के रूप मे प्रयोग किया है और अपने हितो के लिए अच्छी तरह प्रयोग किया है |


इनका न मानवाधिकार से कोई लेना देना है नज़ीर के तौर पर जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने वाला अमेरिका वो दुनिया को मानावाधिकार पर लेक्चर दे या परमाणु बम दूसरे कौन देश रखेंगे और कौन नही रखेंगे ये तय करने वाला अमेरिका या पश्चिमी देश कौन होते हैं |


अल्पसंख्यको पर अत्याचार हो रहा है कब जब अमेरिका को एक और ज़ेलेन्सकी की आवश्यकता हो वो भी अमेरिका के हितो की हिफ़ाज़त करने के लिये और अन्य तीसरे देश से लड़ने के लिये ,तब अल्पसंख्यको का मुद्दा उठाया जाता है |


अपने हितो के लिये दो देशो के विवादित मामलो मे मदाख्लत करके कभी किसी के साथ खड़े हो गये कभी किसी के साथ खड़े हो गये ताकि अपनी ताक़्त के बल पर दूसरे को डराया जाये धमकाया जाये और अपना उल्लू सीधा किया जाये वो भी उस देश के सन्शाधनो को लूट लिया जाये |

इन सबसे काम न चले तो सीधी डकैती और अपहरण पर उतर आये |


दूसरे देशो मे मदाख्लत करके वहां सत्ता पलटा दी जाये जैसे यूक्रेन सीरिया मिश्र लिबिया अफ़्गानिस्तान आदि 

अपने अवैध और अनैतिक कार्यो को कानूनी जामा पहनाना 

दुनिया भर मे लूट डकैती करके जो हुक़ुमत बनायी गयी है |


उस हुक़ुमत को कायम रखने के लिये विभिन्न संगठन बनाना और उसमे अपना वर्चस्व बनाना ताकि दुनिया पर अपनी बात को ज़बरन मनवाने को मजबूर करना जैसे वीटो की ताक़त, ढोंग पीटना की दुनिया के दूसरे देशो मे तानाशाही है और वीटो की तानाशाही पर कुछ न बोलना 

इन सब के बाद करना क्या चाहिए, 

 करना ये चाहिए कि पश्चिम के देशो की मीडिया के हंगामी प्रचार मे न आना और इसके पीछे के गूढ़/ रहस्यो को समझना इन पश्चिमी देशो की संस्थाओ का बहिष्कार करना और अपनी संस्थाओ को खड़ा करना है|


 इन लूटेरो से बचने के लिये इन लूटेरो को ही अपनी मदद के लिये बुलाने की बजाय अपनी मदद के लिए देशो के आपसी तालमेल और सैन्य बल की मदद से इन लूटेरो का मुक़ाबला करना और इनको नेस्त नाबूद करना है ताकि देशो के संशाधन देशो के नागरिको के काम आये न कि इन लूटेरो के जिन्होंने दुनिया को लूटा है सदियों से |

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