Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

USS जार्ज वाशिंगटन पर ईरान का हमला

 USS जार्ज वाशिंगटन पर हमला हो गया ऐसा हमला ईरान ने किया जिसकी हिम्मत न रूस कर सका न चीन कर सका, ईरान के दानिश्वर लोगो ने अमेरिका और उसके लोगों को अच्छी तरह समझा और जाना और इस बात का अध्ययन भी किया गया जिसमे अरब और यूरोप के देशों द्वारा पूर्व में की गई कार्यवाही को देखा। अब पिछले सालों को देखे तो अमेरिका मुस्लिम देशों के खिलाफ काम एक लम्बे समय से करता आ रहा है। सन 1998 में भारत और पाकिस्तान के परमाणु बम के परीक्षण के बाद विश्व का दृश्य लगातार बदलता जा रहा था। सन 1999में कारगिल युद्ध और सन 2000 में हिजबुल्लाह के द्वारा लेबनान की ज़मीन को इसराइल से वापस लेना इसके साथ 2001 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद अफगानिस्तान पर अमेरिका नाटो के साथ मिलकर हमला कर दिया गया और उसी वक़्त समय और सन पर ध्यान दे जब सन 2002 में गुजरात में मुस्लिम नरसंहार किया जा रहा था समय पर गौर करे सन 2003 में इराक़ पर हमला किया। सन 2006 में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच जबरदस्त जंग होती है और इसराइल को इस जंग में जो शिकस्त मिली। उसके बाद अमेरिका और साथी देशों ने फौजी तैयारी शुरू की जिसका नतीजा नज़र आया सन 2011 में जिसमें पश्चिम के तमाम देशों ने लीबिया और सीरिया को निशाना बनाया गया यहां तक कि पेंटागन ने कहना शुरू कर दिया कि आई एस आई एस को 50 साल तक पश्चिम एशिया से कोई बाहर नहीं कर सकता लेकिन ईरान के बुलन्द हौसलों और कासिम सुलेमानी की जंगी हिकमतें अमली ने अमेरिका इसराइल और पश्चिमी देशों की कमर तोड़ दी। इन हमलो के साथ ही अमेरिका ने यूक्रेन के रूसी मूल के प्रेसिडेंट का तख्तापलट दिया और सन 2014 में रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। अमेरिका के दोगलेपन को ईरान न केवल जानता था बल्कि ईरान को मालूम था कि ईरान पर अमेरिका हमला करेगा और इसको वो सन 1979 के ईरान के इस्लामिक क्रांति के बाद इराक़ के ज़रिए हमला करा दिया। ईरान की जंग 26 फरवरी 2026 से शुरू नहीं हुई है बल्कि अमेरिका सन 1979 से सेक्शन के रूप में बिना गोली चलाये जंग जारी रखे है ईरान को बधाई हो जो अमेरिका के आतंकी सोच और दूसरे देशों के संसाधनों को लूटने और उन्हें गरीब बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं, उसको अच्छे ढंग से समझा है इसकी जितनी तारीफ की जाए कम है 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इंजील मे इमाम हुसैन का ज़िक्र

गोग और मगोग (याजूज और माजूज)

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम