Ahmad Rizvi

यूरोपीय युनियन

हज़रत अली अलैहिस सलातो व सलाम का कथन " जब तुम बोलोगे पहचान लिये जाओगे " इस कथन के संदर्भ मे आज के परिदर्श्य को देखते है | अमेरिका  के हुक़्मरान और अमेरिका के फ़ौजियो ने दुनिया के हर कानून को रौन्दते हुवे वेनेज़ुएला पर हमला कर दिया वहां के चुने हुवे राष्ट्रपति और उसकी पत्नी को अगवा कर लिया |  खुलेआम अमेरिका ने आतंकवादी काम किया |ग्रीनलैन्ड और कनाडा पर खुले आम क़ब्ज़ा करने की धमकी दे रहा है अमेरिका | क्या बता सकते हैं यूरोपीय संघ ने अमेरिका की फ़ौज को आतंकवादी संगठन घोषित किया क्या ऐसी हिम्मत जुटा कर फ़्रान्स ने अमेरिकी फ़ौज को आतंकवादी संगठन घोषित किया | क्या जर्मनी ने ऐसा क्या है या ब्रिटेन ने ऐसा किया नही किया | और करते भी क्यों?  दुनिया भर के संशाधनो को यह सब देश मिलकर लूटते आये है | अब इन लूटेरे देशो ने ईरान की IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया इन लूटेरो देशो ने इराक़ अफ़ग़ानिस्तान सिरिया लिबिया वेनेज़ुअला आदि देशो की दौलत को लूटा और बाकि लूट दूसरे देशो को अपने ATOM BOMB को चलाने की धमकी देने के साथ उनसे व्यापार के समझौते करके लूटते आये है? |

राजनिति और धोखा

राजनिति को समझने और उसमे बेवकूफ़ लोगो को किस तरह धोखा दिया जाता है और कम समझ लोगो की भावनाओ /जज़बातो के साथ खेला जाता है 5 अगस्त 2019 को जब जम्मु और कश्मीर से सविन्धान के अनुच्छेद 370 को खत्म किया उस समय आपको याद होगा कि उन्होंने 9 जनवरी 2019 को विरोध में भारतीय नौकरशाही से अपना इस्तीफा दे दिया, जिसमें अन्य बातों के अलावा कश्मीर में "निरंतर हत्याओं" का हवाला दिया गया था, जिसे कथित तौर पर केंद्र सरकार द्वारा "कभी स्वीकार नहीं किया गया" और बाद में उन्होंने इसे वापस भी ले लिया।जीवन की शुरुआत की। इसके तुरंत बाद, 16 मार्च 2019 को, उन्होंने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी, जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) की घोषणा की। उन्होंने 10 अगस्त 2020 को राजनीति छोड़ दी और JKPM छोड़ दी। अप्रैल 2022 में मोदी सरकार ने उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में बहाल कर दिया। अगस्त 2022 में उन्हें केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय में उप सचिव के पद पर तैनात किया गया। अब इसमे गौर करने वाली बात यह है कि चुनाव आयोग ने रजनितिग पार्टी को गठन करने दिया उसे महिनो संचालित करने दिया वो भी IAS होते हुवे क्योंकि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नही किया गया था सरकार पर नरसंहार का आरोप लगाने के बाद उन्हे फ़िर सरकार ने नौकरी पर रख लिया इससे यह समझा जा सकता है कि शाह फ़ैसल जो भी काम कर रहे थे वो सरकार की मंशा के अनुसार कर रहा था और public जो जम्मु और कश्मीर मे majority मे मुस्लिम है शाह फ़ैसल को मुसलमान समझते रहे और शाह फ़ैसल जज़्बात को मजरूह करते रहे कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई अब सचिव के पद पर कार्यरत है

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