Ahmad Rizvi

भूकम्प (ज़लज़ला)

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               भूकम्प (ज़लज़ला) सूरे ज़िलज़लाह  आयत संख्या 1 “ इज़ा ज़ुलज़लाती अर्ज़ ज़िलज़लाह ” जब ज़मीन ज़ोरों से हिला दी जाएगी । कुरान मजीद हर दौर (सब ज़माने/ वक़्त/ युग ) के लिए है भूकम्प या ज़लज़ला के बारे मे जैसा कुरान हकीम मे उल्लेख किया गया है वैसा कहीं और नहीं है पिछले दौर मे भूकम्प आए होंगे हाल मे भी भूकंप आते है और आने वाले समय मे भी भूकम्प आएंगे लेकिन जिस दौर के भूकम्प का जिक्र किया जा रहा है उस के बारे मे आगे आयत बता रही है कि ज़मीन खज़ाने (लफ़्ज़ अखरज़ात का जिक्र किया जिसका अर्थ है खर्च होने वाली चीजे का निकलना जैसे कोयला गैस पेट्रोल डीज़ल सोना कोबाल्ट आदि) उगल देगी । उस वक़्त के ज़मीन के ज़ोरों से हिला देने का जिक्र किया गया है । ज़मीन के हिलाने का ज़िक्र जो किया गया है उसमे यह नहीं कहा गया है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के हुक्म से भूकम्प आएगा मलाएका या जिन्न  के कारण आएगा या आदमी के द्वारा बनाए गये असलहे के कारण होगी इन सब से भूकम्प या जलजला आ सकता है लेकिन सच्ची किताब ने आने वाले वक़्त मे जो जिक्र किया है उसे आज की दुनिया मे समझा जा सकता है पहले के...

अमेरिका के लिए पाकिस्तान का महत्व :3

अगर अमेरिका के सम्बन्ध पूर्णतया पाकिस्तान से खराब हो जाए तो इसका भरपूर लाभ मिलेगा चीन को, ईरान को, मध्य एशिया के देशो को, और रूस को मिलेगा जिससे अमेरिका को बहुत बड़ी हानि पहुंच सकती है, अमेरिका को अफगानिस्तान में अपनी सेना की भारी नुकसान को रोक पाना बहुत मुश्किल होगा इसमें चीन, रूस, मध्य एशिया के देश ईरान और पाकिस्तान के द्वारा अफगानिस्तान मे अमेरिकन और अन्या ईसाई फौजो पर भारी हमले होने आरम्भ हो जायेंगे जिससे अमेरिकन और ईसाई फौजो के कत्ल की ज़िम्मेदारी कोई भी नहीं लेगा और यह पता भी नहीं चलेगा कि किस देश ने हमला कराया। पाकििस्तान केे रुस के साथ अच्छे सम्बन्ध होने से रुस की पहुंच अरब सागर तक हो गई हैं चीन के गवादर मेे पोर्ट बनाने या C. P. E.C. china Pakistan economic corridor के बनने से चीन की पहुुंच अरब सागर तक हो गई है अफगानिस्तान मेंं अमेरिका देशों की मदद करने वाली फौज बुरी तरह घिर चुकी है दूसरी ओर ईरान को घेेेेरने की जो रूपरेखा ईसाई फौजों द्वारा बनाया गयाा है जिसमें ईसाई फौजीी का सीरिया और इराक में उपस्थिति ईरान को घेरने में की गई और अफगानिस्तान से ईरान को घेरने की कोशिश की गई है ईरान को अपनी रक्षा करनेे के लिए कुछ प्रोएक्टिव कदम उठानेेेेेेेेे पड़ेंगे और यह कदम ईसाई फौजियों को भारी नुकिसान पहुंचाना होगा इन ईसाई फौौजो का भारीी नुुुकसान न केवल अफगानिस्तान में बल्कि इराक और सीरिया मे भी करना पड़ेगा यदि ईसाई फौजेे ईरान को बडे पैमानो पर उकसाती हैै तो समपूर्ण मध्य पूर्व एशिया मे ईसाई फौजो कोो बहुुत बड़े पैमाने पर हमला करना होगा और समुदरो मे भी ईसाई फौज को हरााााना नान होगा और यह खौफ भरना होोोगा गकि ईरान पर हमले के नतीजे में वह बहुत बड़ा नुकसान उठााााना पडेगा ।

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