यज़ीद का अक़ीदा क्या था?
इस बात को जानने की कोशिश करते है कि यज़ीद पलीद लानत उल्लाह अलैह का अक़ीदा क्या था? सबसे पहले कर्बला में होने वाली जंग के बाद जो वाक्य उसने कहा उससे तो उसके काफ़िर होने में कोई सन्देह नहीं है।" आज मेरे पूर्वज जो जंगे बद्र और जंगे उहद में मारे गये खुश हो जाते । इससे एक बात तो तय है कि यज़ीद जंगे बद्र और जंगे उहद को जानता था इसके साथ उसके जो मक़तूलीन थे वो काफ़िर थे यह भी जानता था और उसका रसूल उल्लाह का इंकार फ़रिश्तों के नुज़ूल का इंकार किताब उल्लाह का इंकार और यह कहना कि यह सब बनी हाशिम का ढोंग था हुकूमत हासिल करने के लिए इन सब के साथ इस के बाप और दादा अबूसूफियान जो हमेशा काफ़िर रहे और फतेह मक्का में अपनी जान की अमान हासिल की और इससे पहले इस्लाम को मिटाने में अपनी मुख्य भूमिका निभा चुके थे इस्लाम में दाखिले के बाद मौला अली को रसूल ए खुदा ने वही हैसियत अता की जो रिसालत माब की है इसके बाद माविया बागी ए इस्लाम हो गया और काफ़िर हो गया उसका अक़ीदा उस्मान के साथ जुड़ा जो बनी उमैया का फर्द था और उसने मुखालफत की रिसालत माब की और अपने रिश्तेदारों को मरवान और हक़म जिनको शहर बदर किया था रिसालत माब न...

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