Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

                                                                   हस्बुनाह किताबउल्लाह अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अप...

मुस्लिम हुक़्मरान

बाते क़ुरान और हदीस की करते हैं दुनिया के तमाम मुस्लिम हुक़्मरान मगर सूद के कारोबार मे सहयोगी है ये हुक़्मरान पसंद आता है इनको भी शैतानी निज़ाम करते है समर्थन इबलीस का अक़्वामे मुततहिदा मे हर इबलीस के दफ़्तर मे इनका भी हिस्सा है मगर बात करने को मजबूर है निज़ामे मुस्तफा का पसंद इनको हर फ़ेल है इबलीस का डर इनको हमेशा रहता है खसारा वोट का बाते सूद के खिलाफ की मगर दिलचस्पी एफ़.डी. के interest मे भी

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