Ahmad Rizvi

भूकम्प (ज़लज़ला)

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               भूकम्प (ज़लज़ला) सूरे ज़िलज़लाह  आयत संख्या 1 “ इज़ा ज़ुलज़लाती अर्ज़ ज़िलज़लाह ” जब ज़मीन ज़ोरों से हिला दी जाएगी । कुरान मजीद हर दौर (सब ज़माने/ वक़्त/ युग ) के लिए है भूकम्प या ज़लज़ला के बारे मे जैसा कुरान हकीम मे उल्लेख किया गया है वैसा कहीं और नहीं है पिछले दौर मे भूकम्प आए होंगे हाल मे भी भूकंप आते है और आने वाले समय मे भी भूकम्प आएंगे लेकिन जिस दौर के भूकम्प का जिक्र किया जा रहा है उस के बारे मे आगे आयत बता रही है कि ज़मीन खज़ाने (लफ़्ज़ अखरज़ात का जिक्र किया जिसका अर्थ है खर्च होने वाली चीजे का निकलना जैसे कोयला गैस पेट्रोल डीज़ल सोना कोबाल्ट आदि) उगल देगी । उस वक़्त के ज़मीन के ज़ोरों से हिला देने का जिक्र किया गया है । ज़मीन के हिलाने का ज़िक्र जो किया गया है उसमे यह नहीं कहा गया है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के हुक्म से भूकम्प आएगा मलाएका या जिन्न  के कारण आएगा या आदमी के द्वारा बनाए गये असलहे के कारण होगी इन सब से भूकम्प या जलजला आ सकता है लेकिन सच्ची किताब ने आने वाले वक़्त मे जो जिक्र किया है उसे आज की दुनिया मे समझा जा सकता है पहले के...

जजो की फ़टकार

जजो को पुलिस अधिकारीयो व पुलिसकर्मी को फ़टकार लगाते सैकड़ों बार देखा गया है कभी किसी पुलिस अधिकारी पर सख्त action लेते नही दिखा जबकि पुलिस अधिकारी व कर्मी कानून के जानकार है और उनके द्वारा किया गया कार्य सिर्फ़ और सिर्फ़ निजि लाभ के लिये या सत्ता के द्वारा promotion की लालच मे किया जाता है कानून के साथ खेले जाने वाले अपराध के लिये सिर्फ़ और सिर्फ़ फ़टकार और लगातार फ़टकार न्याय के साथ मज़ाक है और अपराध पर सज़ा देने के बजाय उसको फ़टकार देना उसको अपराध को करने के लिये प्रोत्साहन देना है और जनता के गुस्से रोष को ठंडा करने का प्रयास है और न्यायालय की गरिमा को बढ़ाना है|

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