Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

                                                                   हस्बुनाह किताबउल्लाह अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अप...

ज़ियारते क़ुबूर मोँमीनीन /ziyarate quboor momineen/زيارت قبور مومنين


हज़रत अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम फरमाते है कि जिस वक्त कब्रिस्तान मे दाखिल हो तो यह कहो :-बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम 

अस सलामो अलि अहले ला इलाहा इललल्लाहो मिन अहले ला इलाहा इललल्लाहो या ला इलाहा इललल्लाहो बेहक़़के़ ला इलाहा इललल्लाहो कयुफ वजदुतुम कौला ला इलाहा इललल्लाहो मिन अहले ला इलाहा इललल्लाहो या ला इलाहा इललल्लाहो बेहक़़के़ ला इलाहा इललल्लाहो इगफिर लेमन काला ला इलाहा इललल्लाहो वहशुरना फी ज़ुमरते मन  कालाला इलाहा इललल्लाहो मोहम्मदुर रसूल उल्लाहे अलीयन वली उल्लाहे 











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