Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

ईरान का फतवा!

ईरान का फतवा! ईरान के सुप्रीम लीडर ने फतवा दिया है कि परमाणु बम नहीं बनायेगा कारण यह दिया कि सामूहिक रूप से क़त्ल करना हराम है इस बात से सहमत हूं सही बात है हिकमतें अमली भी है फ़िर मन में सवाल पैदा हुआ क्या इस्लाम में अपने लोगों को सामूहिक रूप से क़त्ल हो जाने की इजाज़त है ? क्या इस्लाम में जो कसास लेने का ज़िक्र अल्लाह सुभान व तआला क़ुरआन मजीद में ज़िक्र कर रहा है। ईरान के न्यूक्लियर साइट फोरदो इस्फहान आदि में बंकर बस्तर बम द्वारा 22 जून 2025 अमेरिका ने हमला किया अगर इसी तरह का हमला ईरानी जनता पर किया जाता है तब क्या ईरान बदला ले सकता है क्या कसास लिया जा सकता है अगर इरादा भी किया जाए बदला लेने का तब भी नहीं कर सकते हैं जानते है क्यों क्योंकि ईरान के पास वैसे परमाणु हथियार हैं ही इसलिए फतवे से असहमति की है ईरान का फतवा इस्लाम के नज़रिए से सही हो सकता है लेकिन अगर इस्लाम के कसास के क़ुरआन मजीद के आदेश को देखा जाए तो यह ताजाजाद कर रहा है ईरान का दुश्मन अमेरिका इंसानियत का दुश्मन भी है और इसने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरा चुका है ऐसे में अमेरिका और उसके साथी इंसानियत के बदतरीन दुश्मन हैं अफगानिस्तान पर deplicted uranium से हमला कर चुके हैं ऐसा ही इराक़ के साथ भी किया जा चुका है इसलिए मै अपनी निजी राय है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का फतवा से असहमत हूं।

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