Ahmad Rizvi

सहाबा का एहतराम!

बिरादर मुस्लिम सवाल उठाते हैं कि सहाबा का एहतराम शिया नहीं करते कभी सवाल पूछा कि सहाबा का एहतराम कितना उस वक़्त के लोगो ने किया निम्न नज़ीर देता हूं:- 1. हज़रत अली अलैहिस सलाम अहले बैअत नबी भी है जानशीन रसूल भी है मौला भी सहाबी ए रसूल भी है हज़रत अली को रस्सी से बांधने वाले मुनाफिकों पर खामोश रहते है। नहीं बताओगे कि सहाबा का एहतराम करना चाहिए। 2. हज़रत अबुज़र गफ़ारी का नाम तो सुना होगा उनको सहाबी ही शहर बदर कर रहे सहाबी ही पिटवा रहे हैं। क्यों अब खामोश हो अब नहीं बताओगे सहाबा का एहतराम क्यों नहीं किया। 3. हज़रत हुजर बिन अदी को तशदूद करके जान से मार दिया गया सहाबा के चहीतो तुम्हारी खामोशी तुम्हारी मक्कारी को इन्क़ेशाफ़ कर रही है। सहाबा की आड़ में अहले बैअत नबी, रसूल उल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम और उनकी आले पाक मुखालफत करना है वरना सहाबा की अज़मत की बात होती अहले बैअत से लड़ने वाले मुनाफिकों के नक़ाब को उतार फेंकते उनका देफा न करते।  

काफ़िर

 हर धर्म /मज़हब (religion)  ने अपने विरोधीयों के लिये कुछ न कुछ कहा है वो चाहे यहूदी हो ईसाई हो हिन्दू हो या इस्लाम हो |

लेकिन पूरी दुनिया मे जो हंगामा काफ़िर लफ़्ज़ के साथ होता है वो दूसरे किसी और धर्म मे दिये गये शब्द पर नही किया जाता है | इसका कारण दूसरे धर्मो की जानकारी न होना है |

इस्लाम मे काफ़िर किसे कहा गया है? 

अक्सर लोगो ने काफ़िर का जो अर्थ बताया है उस मे अल्लाह का इंकार करने वाले को काफ़िर होना बताया गया है | यह हो सकता है लेकिन सुरे काफ़िरून मे रब का कलाम  " कह दिजिये काफ़िरो से  नही है अब्द (इबादत करने वाले) उसके जो तुम्हारा आराध्य ( माबूद) है |और न तुम इबादत करते हो जो मेरा आराध्य है | यहाँ काफ़िर होना अल्लाह को न मानने वाले के साथ वो भी काफ़िर है जो अल्लाह को छोड़ कर किसी अन्य को इबादत करता है इसमे दुनिया भर के अलग अलग आराध्य को मानने वाले लोग आ गये |

एक और सवाल पैदा होता है वो यह कि ईसाई और यहूदी तो एक खुदा मानते है फ़िर यह दोनो भिन्न कैसे हो गये? 

ईसाई यहूदी और मुसलमानों का खुदा तो एक है मगर खुदा को जिस चश्मे से देखते है वो चश्मा या नज़रिया अलग अलग है कैसे?  यहूदी भी हज़रत उजैर को खुदा का बेटा मानते है और ईसाई भी हज़रत ईसा को खुदा का बेटा मानते है | इस्लाम इन दोनो नज़रिये को रद करता है और सुरे इख्लास मे है कह दिजिये वो अल्लाह अहद है अल्लाह बेनियाज़ है उस से कोई जन्मा नही और न वो किसी से जन्मा | दोनो ईसाई और यहूदी नज़रिये को रद करता है | अल्लाह ईसाई यहूदी मुस्लिम का एक होने के बाद भी नज़रिये का फ़र्क़ है यह फ़र्क़ भी क्या काफ़िर बनाता है research का विषय बन सकता है |

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