Ahmad Rizvi

अमेरिका इस्राइल और ईरान की जंग मे भारत किसके साथ है?

भारत सरकार ने औपचारिक रूप से घोषणा नही की है कि वह इस्राइल के साथ है या ईरान के साथ है लेकिन कुछ हरकतो से समझा जा सकता है कि भारत मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस्राइल और अमेरिका के साथ है जंग से पहले जब विएना मे अमेरिका और ईरान की वार्ता होने के दौरान प्रधानमंत्री का इस्राइल दौरा और वहां पर प्रधानमंत्री का इस्राइल को समर्थन करना अपने आप में बहुत कुछ कह रहा है  भारत के प्रधानमंत्री का अपने देश मे वापस आना और उसके साथ ही ईरान पर अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला कर दिया :- 1. अमेरिका इस्राइल के ईरान पर  किये गये आक्रमण के बाद भारत सरकार ने उसकी भर्तसना नही की इस से पता चलता है कि सरकार का चुप रहना मौन स्वीक्रति है  2. ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई को वहशियाना क़त्ल के बाद और विपक्ष के सरकार से सवाल करने के बाद भी भारत सरकार ने अमेरिका और इस्राइल को न तो भर्तसना की और न कोइ शोक सन्देश दिया इस से लोगो को यह भरोसा हो गया कि भारत सरकार ने ईरान के खिलाफ़ मौकूफ़ अख्तियार किया है और अमेरिका और इस्राइल का समर्थन किया है  3. जंग के दौरान ओमान सागर मे भारत सरकार ने वार शि...

मोसाद और अन्य खुफ़िया एजेन्टो की गिरफ्तारी व क़त्ल

हाल ही मे ईरान पर अमेरिका हमले की प्रचार प्रसार हो रहा था लेकिन इस दौरान अमेरिका की वार मशीनरी को ईरान के इर्द गिर्द पहुँचाया जा रहा है फ़ौज मे इज़ाफ़ा किया जा रहा है जंग मे हमेशा धोखा देना बडा हथियार होता है | अमेरिका बहुत बडा मासूम बनकर इन्सानो से बडी मोहब्बत करने वाला बनकर दुनिया को यह बता रहा है कि ईरान मे प्रदर्शनकारियों की फ़ान्सी नही दी जा रही है इसलिए जंग को रोक दिया है |

क्या यही बात है या कोई और बात है इस बीच कहा जा रहा है कि ईरान के पास परमाणु बम आ चुका है | या ईरान की मिसाईल पावर के कारण जंग को टालना पड़ा है | 

ईरान मे होने वाले प्रदर्शनो मे मोसाद और अन्य देशो के खुफ़िया एजेन्टो का प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर सशस्त्र  संघर्ष करना और इस दौरान अमेरिका की सी आई ए और इस्राइल की मोसाद के एजेन्टो की गिरफ्तारी और उन्के क़त्ल होने की आशंका से अमेरिका और इस्राइल भयभीत हो गये हैं और इन एजेन्टो की जान को खतरा मे देखकर अमेरिका जंग को टाल रहा है लेकिन यह टालना कब तक हो सकता है |

अमेरिका और मोसाद के एजेन्टो के साथ क्या हो रहा होगा यह कल्पना ही किया जा सकता है |

यह वही अमेरिका है जिसने जापान पर परमाणु बम मार कर लाखो लोगो का क़त्ल किया और लाखो को घायल किया था  लाखो अफ़्गान बेगुनाहो का क़त्ल किया इराक़ मे क़त्ल ए आम किया सीरिया लिबिया यमन मे क़त्ल ए आम किया लगातार गाज़ा मे मासूम फ़िलिस्तीनीयों के क़त्ले आम करने के लिए इस्राइल को घातक हथियार आपूर्ति की आज उसका दिल रहम से भर गया ईरानीयों के लिये या हज़ारो की तादाद मे मोसाद और सी आई ए के पकड़े गये गिरफ़्तार हुवे एजेन्टो के लिए अभी और न जाने कितने एजेन्ट पकड़े जाएंगे और कितने एजेन्ट क़त्ल किये जा चुके होंगे और अन्य कितने एजेन्ट क़त्ल होने की कगार पर होंगे ऐसे मे मोसाद चीफ़ का अमेरिका जाना और नेतनयाहू का कहना कि उन्होने जंग को ऐन वक़्त रुक्वा दिया तो यह जंग का रुक्वाना ईरान की हमदर्दी मे किया गया प्रदर्शनकारियों के खैर ख्वाही के लिये किया ऐसा सोच रहे हैं तो आप गलत है अमेरिका और इस्राइल इस वक़्त सबसे ज्यादा परेशान है तो मोसाद और सी आई ए के लोगो की गिरफ्तारी और उनके क़त्ल से ऐसा नाचीज़ की राय है |

Comments

Popular posts from this blog

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

खलीफा

इंजील (बाइबल ) मे मोहम्मद मुस्तफा रसूलउल्लाह का उल्लेख