Ahmad Rizvi

काफ़िर

  हर धर्म /मज़हब (religion)  ने अपने विरोधीयों के लिये कुछ न कुछ कहा है वो चाहे यहूदी हो ईसाई हो हिन्दू हो या इस्लाम हो | लेकिन पूरी दुनिया मे जो हंगामा काफ़िर लफ़्ज़ के साथ होता है वो दूसरे किसी और धर्म मे दिये गये शब्द पर नही किया जाता है | इसका कारण दूसरे धर्मो की जानकारी न होना है | इस्लाम मे काफ़िर किसे कहा गया है?  अक्सर लोगो ने काफ़िर का जो अर्थ बताया है उस मे अल्लाह का इंकार करने वाले को काफ़िर होना बताया गया है | यह हो सकता है लेकिन सुरे काफ़िरून मे रब का कलाम  " कह दिजिये काफ़िरो से  नही है अब्द (इबादत करने वाले) उसके जो तुम्हारा आराध्य ( माबूद) है |और न तुम इबादत करते हो जो मेरा आराध्य है | यहाँ काफ़िर होना अल्लाह को न मानने वाले के साथ वो भी काफ़िर है जो अल्लाह को छोड़ कर किसी अन्य को इबादत करता है इसमे दुनिया भर के अलग अलग आराध्य को मानने वाले लोग आ गये | एक और सवाल पैदा होता है वो यह कि ईसाई और यहूदी तो एक खुदा मानते है फ़िर यह दोनो भिन्न कैसे हो गये?  ईसाई यहूदी और मुसलमानों का खुदा तो एक है मगर खुदा को जिस चश्मे से देखते है वो चश्मा या नज़रिया अलग अलग ह...

सबका साथ सबका विकास

अभी तक आपने सबका साथ और सबका विकास का नारा सुना होगा आइये आपको उस विकास की ओर ले चलते हैं जिसमे कोई जाति मज़हब रंग सम्प्रदाय का भेद नही किया गया है और सबका विकास बराबर किया गया है किसी के साथ कोई नाइंसाफी नही की गयी 1. टेलीकाम सेक्टर को लेते है जो incoming का लुत्फ़ बिना पैसा डलाये लेते थे उनको अब फ़्री incoming मिलना खत्म tarrif के दाम बढा दिये गये इससे telecom कम्पनी को ज़बरदस्त लाभ पहुंचा और इस विकास मे कोई भेदभाव नही किया गया 2. रेल किराये मे बढ़ोतरी और reservation कानून मे बद्लाव किया गया जिससे सरकार को बडा लाभ पहुंचा क्या आप नही चाहते कि देश का विकास हो 3. bank के interest को इतना कम कर दिया और जो बढा हुआ interest था वो सरकार के पास गया क्या आप नही चाहते कि देश का विकास हो 4. gas cylinder के दाम मे बेतहाशा बढ़ाया गया इन सब विकास मे किसी को नज़र अन्दाज़ नही किया गया 5. फ़ीस बढ़ाने मे चाहे वो school की फ़ीस हो institution की फ़ीस किसी कार्यालय की फ़ीस हो न्याय शुल्क हो 5. post office के शुल्क मे बढ़ोतरी बाकि याद नही आप लोगो को अपने विकास के बारे मे कुछ याद आये तो comment करे

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