Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

सबका साथ सबका विकास

अभी तक आपने सबका साथ और सबका विकास का नारा सुना होगा आइये आपको उस विकास की ओर ले चलते हैं जिसमे कोई जाति मज़हब रंग सम्प्रदाय का भेद नही किया गया है और सबका विकास बराबर किया गया है किसी के साथ कोई नाइंसाफी नही की गयी 1. टेलीकाम सेक्टर को लेते है जो incoming का लुत्फ़ बिना पैसा डलाये लेते थे उनको अब फ़्री incoming मिलना खत्म tarrif के दाम बढा दिये गये इससे telecom कम्पनी को ज़बरदस्त लाभ पहुंचा और इस विकास मे कोई भेदभाव नही किया गया 2. रेल किराये मे बढ़ोतरी और reservation कानून मे बद्लाव किया गया जिससे सरकार को बडा लाभ पहुंचा क्या आप नही चाहते कि देश का विकास हो 3. bank के interest को इतना कम कर दिया और जो बढा हुआ interest था वो सरकार के पास गया क्या आप नही चाहते कि देश का विकास हो 4. gas cylinder के दाम मे बेतहाशा बढ़ाया गया इन सब विकास मे किसी को नज़र अन्दाज़ नही किया गया 5. फ़ीस बढ़ाने मे चाहे वो school की फ़ीस हो institution की फ़ीस किसी कार्यालय की फ़ीस हो न्याय शुल्क हो 5. post office के शुल्क मे बढ़ोतरी बाकि याद नही आप लोगो को अपने विकास के बारे मे कुछ याद आये तो comment करे

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