Ahmad Rizvi

यूरोपीय युनियन

हज़रत अली अलैहिस सलातो व सलाम का कथन " जब तुम बोलोगे पहचान लिये जाओगे " इस कथन के संदर्भ मे आज के परिदर्श्य को देखते है | अमेरिका  के हुक़्मरान और अमेरिका के फ़ौजियो ने दुनिया के हर कानून को रौन्दते हुवे वेनेज़ुएला पर हमला कर दिया वहां के चुने हुवे राष्ट्रपति और उसकी पत्नी को अगवा कर लिया |  खुलेआम अमेरिका ने आतंकवादी काम किया |ग्रीनलैन्ड और कनाडा पर खुले आम क़ब्ज़ा करने की धमकी दे रहा है अमेरिका | क्या बता सकते हैं यूरोपीय संघ ने अमेरिका की फ़ौज को आतंकवादी संगठन घोषित किया क्या ऐसी हिम्मत जुटा कर फ़्रान्स ने अमेरिकी फ़ौज को आतंकवादी संगठन घोषित किया | क्या जर्मनी ने ऐसा क्या है या ब्रिटेन ने ऐसा किया नही किया | और करते भी क्यों?  दुनिया भर के संशाधनो को यह सब देश मिलकर लूटते आये है | अब इन लूटेरे देशो ने ईरान की IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया इन लूटेरो देशो ने इराक़ अफ़ग़ानिस्तान सिरिया लिबिया वेनेज़ुअला आदि देशो की दौलत को लूटा और बाकि लूट दूसरे देशो को अपने ATOM BOMB को चलाने की धमकी देने के साथ उनसे व्यापार के समझौते करके लूटते आये है? |

72 हूरे

72 हूरे हो या 72000 हूरे हो यह अक़ीदा /ईमान तो उसका है जो अल्लाह पर भरोसा करता है और उस कुफ़फार को अल्लाह के वजूद का ही विश्वास (यकीन) नहीं , उसके वजूद का इंकार करता है उसके लिए न हूर न लंगूर है न गिलमा है न जन्नत है न हिसाब किताब है न महशर है न कयामत है न फ़रिश्ते है गोया कुछ नहीं और तुम्हारी कोई बाजगश्त (पूछ ताक्ष ) नहीं जो ज़ुल्म करो जो भलाई करो सब ठीक । लेकिन जो इस पर यकीन रखता है ईमान है उसको मालूम है कि उसके इन कारनामों की भलाई और बुराई की सजा और जजा (बदला ) है लेकिन उसके इस बेयकीनी से सच्चाई को बदला नहीं सकेगा और अल्लाह इरशाद फरमाता है कि यहाँ तक कि तुमने कब्रों से मुलाकात कर ली , देखो तुम्हें अनकरीब मालूम हो जाएगा और फिर खूब मालूम हो जाएगा , देखो अगर तुम्हें यकीन इल्म हो जाता कि तुम जहन्नम को जरूर देखोगे फिर उसे अपनी आँखों से देखे यकीन की तरह देखोगे और फिर तुम से उस दिन नेअमत के बारे मे सवाल किया जाएगा । “मैंने तुम्हें एक हक़ीर नुतफे से पैदा किया अपनी पहली पैदाइश को देखो मै तुम्हें दोबारा पैदा करूंगा मेरे दोबारा पैदा करने का इंकार करते है “ कुफ़फार के अल्लाह के वजूद का इंकार , उसकी जन्नत दोज़ख का इंकार और अन्य चीजों का इंकार पर अल्लाह ने सख्त अज़ाब की जो चेतावनी दी है, उसको पूरा करना मुसलमानों का काम नहीं है , अल्लाह का काम है , जो उसे पूरा करेगा । रही बात हूर और जन्नत की तो काफिर और मुसलमानों मे यही फ़र्क है कि मुसलमान अल्लाह पर यकीन करता है और काफिर अल्लाह का इंकार । इसलिए अकीदे की छूट अल्लाह ने भी दी और उसके इसी कानून को दुनिया के हर देश ने माना ।

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