Ahmad Rizvi

हस्बुनाह किताबउल्लाह

अल्लाह के नबी रहमतुल आलमीन सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम का इरशाद है “ इन्नी तायरतुन फ़ीस सक़लैन किताबउल्लाह और इतरती” मै दो वज़नी चीज़े छोड़ जाता हूँ अल्लाह की किताब और इतरत अगर इन दोनों को थामे रहोगे तो गुमराह नहीं होगे, मगर उस दौर में भी ऐसे व्यक्ति थे जो रिसालत माब सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की मुखालफत करने की ज़ुर्रत रखते थे और उन्होंने मुखालफत की जबकि अल्लाह के नबी सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की एताअत वाजिब है जिसने भी यह कहा है “हस्बुनाह किताबउल्लाह” मेरे लिए अल्लाह की किताब काफी है , क्या यह कहना दुरूस्त है जबकि रसूलउल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अल्लाह की किताब “कुरान मजीद “ और अपनी इतरत को थामने या मज़बूती से पकड़ने का हुक्म दिया है आगे देखते है कि हस्बुन्नाह किताबउल्लाह क्या किताब अल्लाह को बगैर इतरत के समझा जा सकता है अगर हाँ , तो कितना , अगर नहीं तो कितना ? अलिफ़ लाम मीम (सुरे बकरा, सुरे आले इमरान) अलिफ़ लाम मीम स्वाद (सुरे आराफ़) अलिफ़ लाम रा (सुरे युनुस, हूद, इब्राहीम, हज्र) काफ हा या   ऐन स्वाद (सूरे मरियम) ताहा (सूरे ताहा ) ता सीन मीम (सूरे शोरा) ता सीन (सूरे नम्ल) त...

ग़ैब का इल्म

वह भी कभी कभी बहस और मुुबाहिसा करतेे है जिन्हें ग़ैैैब के बारे में बिल्कुल भी जानकाारी नहीं है एक वकील साहब ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम के और अल्लाह के ग़ैब के बारे मे होने वाले मुबाहिसों का ज़िक्र (उल्लेख) किया जिसमे बहस का मौज़ू (विषय) यह था कि अल्लाह के ग़ैब के इल्म मे से नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम को कितना प्रतिशत ग़ैब का इल्म था यह percentage 10% , था 20% था या 30% था या उससे ज़्यादा था इस पर मेरे द्वारा सवाल किया गया यह बताओ पहले तो आप अल्लाह के ग़ैब का सम्पूर्ण इल्म हो फिर नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम के ग़ैब के इल्म के बारे मे जानकारी हो तब आप उसका percentage निकाल पाएंगे जो मुमकिन नहीं है। लिहाजा ऐसी बहसो को सिरे यानि शुरुवात से ही खत्म कर दिया करे। आइये देखते है नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने बनी नव आदम की औलाद को कितना ग़ैब का इल्म दिया रोम की फतह सुरे रोम का ज़िक्र (उल्लेख) कुरान मजीद मे किया गया है जिसमे फारसियों की हार और रोम की फतह का ज़िक्र (उल्लेख) किया है। हज़रत अम्मार बिन यासिर के कत्ल की बशारत नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने हज़रत अम्मार यासिर के कत्ल की बशारत दी और यह भी बताया कि बागी गिरोह करेगा। हज़रत अली अमीरुल मोमीनीन की शहादत नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने अमीरुल मोमीनीन की शहादत की बशारत दी और क़ातिल को बदबख़्त होने के बारे मे बताया। उम्मुल मोमीनीन आयशा के बारे मे नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने फरमाया मेरी एक बीबी जो हक़ पर नहीं होंगी उस पर हबबाब के कुत्ते भौंकेगे जो जंगे जमल मे पहुँचने से पहले हब्बाब नाम की जगह पर कुत्ते भौंकने के साथ पेशीनगोई पूरी हुई। कर्बला के बारे मेकर्बला सन 61 हिजरी मे वाकै हुई अल्लाह के नबी सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम दुनिया से 11 हिजरी रुखसत हो गए कर्बला के बारे मे तफसील से बताया। कब्र के बारे मे क़ब्र मे इन्सान/आदमी के साथ होने वाले अज़ाब या राहत के बारे मे बताया। हश्र मे हश्र मे इन्सानो के आमाल और जज़ा के बारे मे और उम्मत की बख्शीश कराने के बारे मे बताया। हमेशा की ज़िन्दगीआखरत की ज़िन्दगी हमेशा की होगी इसकी बशारत दी गयी। आखरी जामाने मे कुस्तुनतुनीया की फतह कुस्तुनतुनीया , constantinopole,istanbul टर्की के एक शहर का विभिन्न नाम है और उसकी फतह का ज़िक्र किया गया है जो होना बाकी है। आखिरी ज़माने मे ईसाइयो से जंग को तफसील से बताया गया है। इमाम मेंहदी के ज़हूर के बारे मे व हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का आसमान से दुनिया मे उतरना ,याजूज़ माजूज का निकालनानबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने फरमाया मेरी उम्मत को कोई पनाह की जगह नहीं मिलेगी और मुसलमान परेशानी मे घिरे होंगे उस वक़्त इमाम के ज़हूर के बारे मे बताया। ज़हूर इमाम की और भी बहुत सी पेशीनगोई है। ग़ैब के इल्म के बारे मे कलम कासिर है कि नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह व आले वसल्लम ने कितना ग़ैब का इल्म बताया है इसलिए माज़रतख्वा हूँ जितना जहन मे था नकल कर दिया।

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