Ahmad Rizvi

कुफ़्र व मुनाफ़कत

 अल्लाह सुभान व तआला का इंकार करने वाला काफ़िर है लेकिन अल्लाह सुभान व तआला को मानता हो और इसके बाद भी काफ़िर हो इसकी कोई दलील है इब्लीस  अल्लाह को मानता है उसको सज्दा करता है लेकिन हज़रत आदम को सज्दा करने के अल्लाह के हुक़्म का इंकार करना इब्लीस को काफ़िर बनाता है | अब जो अल्लाह सुभान व तआला के हुक़्म फ़ैस्ले तकर्रूरी पर सहमत न हो वो काफ़िर है | एक और इन्सान भी है जो न मुस्लिम है और न काफ़िर है दो नम्बरी है, का ज़िक्र है वो मुनाफ़िक़ है |इस मुनाफ़िक़ के बारे मे यह है कि अल्लाह सुभान व तआला को मानता है रसूल उल्लाह सलल्लाहो अलैह व आले वसल्लम की रिसालत का इक़रार भी करता है मगर दिल से रसूल की गवाही नही देता है उसे मुनाफ़िक़ करार दिया गया है | आज कल लोग बड़े फ़ख्र से कहते है कि हम सेकुलर है जिसका मतलब ही मुनाफ़िक़ है |

ज़ेहनी यलगार

भारत मे मुस्लिमो पर जो हमले हो रहे हैं उसमे तरह तरह की नाइन्साफ़ी के साथ ज़ेहनी तौर पर ज़ख्मी करने का लगातार कोशिश जारी रहती है दैनिक जागरण के दिनांक 15-02-2026 के झंकार मे तरुण विजय का एक लेख छपा है तरुन विजय आर एस एस के एकटिव कारकुन  है और पांचजन्य के पूर्व सम्पादक है |

मोहन लाल टिक्कू का 11 दिसंबर 1990 के अंक मे एक विज्ञापन उर्दू दैनिक श्रीनगर टाइम्स मे छपा था जिसमे हिन्दू परिवार इस्लामी जिहादीयो से हरिद्वार जाने की अनुमति मांग  रहा है जिसके अंश इस तरह है :-

" मेरे पिता का देहान्त हो गया है, हिन्दू रीति -रिवाज के अनुसार उनकी अस्थियाँ (फ़ूल) हरिद्वार मे गंगा जी मे प्रवाहित करने हमे जाना है | आपसे प्रार्थना है हमे हरिद्वार यात्रा की इजाज़त दे "

दूसरे अंश मे " प्रथ्वी पर भारत एकमात्र देश है, जहाँ के देशभक्त नागरिको को 'स्वतन्त्र सम्प्रभु राष्ट्र ' मे राष्ट्र ध्वज के प्रति वफ़ादारी और धर्मनिष्ठा के कारण अंतहीन अत्याचारो का शिकार होना पड़ा |अपने ही देश मे निर्वासन भोगना पड़ा | कश्मीरी हिन्दू अपने घर, सेब के बगीचे, खेत,अखरोट  और बादाम के पेड़, सब जस के तस छोड़कर आने पर मजबूर हुवे| कश्मीर के मुस्लिम नेता, उन हिन्दूओ के मुस्लिम पडोसी, उनके मुस्लिम मित्र सब मुंह मोड़कर अपने ही रक्त बन्धुओ और माँ -बहनो को रोते -बिलखते जाते देखते रहे |किसी ने उनको रोका नही, किसी ने उनको बचाया नही |

मोहन लाल टिक्कू ने जो advertisement दिया उसमे वो तमाम मुजाहिद्दीन भाईयो से अपील कर रहे हैं president rule होने पर मोहन लाल टिक्कू ने कोई मदद भारत सरकार से या भारतीय फ़ौज से मदद नही मांगी क्या मोहन लाल को भारत सरकार और भारतीय फ़ौज और पुलिस पे कोई भरोसा नही रह गया था उन्हे मुजाहिद्दीन भाईयो पर भरोसा था जबकि हम भारतीय स्वतन्त्र सम्प्रभु राष्ट्र  कहते है इस स्वतन्त्र सम्प्रभु राष्ट्र ने अपने नागरिको को निहत्था कर रखा है और भारत सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अपने निहत्थे नागरिको की रक्षा करे |

कश्मीर के मुस्लिम नेता, उन हिन्दूओ के मुस्लिम पडोसी, उनके मुस्लिम मित्र सब मुंह मोड़कर अपने ही रक्त बन्धुओ और माँ -बहनो को रोते -बिलखते जाते देखते रहे |किसी ने उनको रोका नही, किसी ने उनको बचाया नही |

लोग आरोप लगाते है कि उस समय के जम्मु और कश्मीर के गवर्नर जगमोहन जिनका समबन्ध आर एस एस था उनकी योजना थी कि हिन्दूओ को कश्मीर से निकाल कर मुस्लिमो का नरसंहार किया जाये |

उसके बाद लाखो मुस्लिमो का क़त्ल किया गया कितने महिलाओ के साथ बलात्कार किया गया कितने ज़ुल्म के शिकार होकर मानसिक सन्तुलन खो बैठे है मुस्लिम पडोसी मुस्लिम मित्र पर इल्ज़ाम लगाया जा रहा है कभी आर एस एस के लोग सेना पर और पुलिस की भुमिका की बात करेंगे जिन की ज़िम्मेदारी ही जनता के जान माल की रक्षा करना है वो क्या कर रहे थे हथियारबन्द सरकारी सेना और पुलिस रक्षा नही कर रही है या रक्षा करने मे अक्षम है और निहत्थे नागरिको से उम्मीद की जा रही है कि वो बचाते यह सिर्फ़ लोगो को गुमराह करना है और ज़िम्मेदार लोगो को कटघरे मे खड़े करने की जगह पीडित को ही ज़िम्मेदार बनाना और  दोषी ठहराना है और जब उसमे political mileage मिले और मुस्लिमो के खिलाफ़ हो तो सोने पर सुहागा है |

Comments

Popular posts from this blog

दावत-ए-ज़ुल अशिरा व गदीर -ए- खुम

खलीफा

इंजील (बाइबल ) मे मोहम्मद मुस्तफा रसूलउल्लाह का उल्लेख